मुद्दे व्यंग

बड़ा मुश्किल है दुनिया का सँवरना

हर एक इंसान के पास अपनी एक दीवार है । अपनी दीवार पर लिखकर वो किसी के काम में या किसी की क्रांति में टाँग नही अड़ा रहा है। अगर आप किसी की पोस्ट का विरोध अपनी वाल पर सिर्फ इस कारण से कर रहे है कि वो पोस्ट फिज़ूल है उससे कुछ होनी जानी नही है तो सोचिए आप के पास लिखने को कुछ नही है ।

दुनिया भर की हजारों मुद्दे समस्याएं छोड़ कर आप एक ऐसी पोस्ट के विरोध में पोस्ट डाल रहे है जिसके बारे में आपको पक्का विश्वास है कि उससे कुछ फायदा नही है ।

कितने भले इंसान है अपना वक्त खर्च करके उस इंसान के वक्त की बचत करना चाहते है जिसकी पोस्ट आपको पसंद भी नही आती ।और जो उस विरोध के विरोध में दो पोस्ट और डाल देते है उनके मन मे कितना संशय है अपनी पोस्ट के लिये। उन सबसे खाली अमोल सरोज है जो उन दोनों पर पोस्ट लिख देता है ।

सबको एक बार रुककर रात को सोचना चाहिए कि जो भी हम फेसबुक पर करते है उसमें समाज में बदलाव की चाहत कितनी है , खुद का मेंटल सेटिस्फेक्शन कितना है और टाइम पास कितना है। कुछ भी सफेद और स्याह में नही है सभी मुद्दे अच्छी इंटेंशन से ही शुरू होते है फिर धीरे धीरे ईगो और दिमागी कसरत बन जाते है । पक्ष विपक्ष वाले सभी भले और तर्कशील लोग है । डेमोक्रेसी का नियम है जब तक कोई किसी को रोके नही तब तक ओके है अगर सेल्फी से नही कुछ होना तो इग्नोर कीजिये ऐसा कुछ लिखिए जिससे आपको उम्मीद है कुछ हो सकता है । और अगर कोई विरोध कर ही रहा है अपनी वाल पर तो ये उसका लोकतांत्रिक अधिकार है मूर्खता करना कोई अपराध नही है बशर्ते उससे किसी का नुकसान न हो । आप का ध्यान समर्थन में आने वाले लोगों की बजाय उनपर है जो विरोध कर रहे है।

यकीन मानिए एक वक्त के बाद कोई किसी की क्रांति के बीच नही आ रहा है अपन सब अपना टाइम पास कर रहे है । मैं भी बुखार में ये पोस्ट इसीलिये लिख रहा हूँ कि दिल को लिखने से सकून मिलता है ।भारत मे सामाजिक काम करने वालो का ईगो आसमान पर रहता है। रहना भी चाहिए । जिस समाज के लिये हम इतनी मेहनत कर रहे है वो अगर हर रोज दस तोपों की सलामी न दे तो क्या फायदा । पर इसमें एक दिक्कत है उस समाज की समझ इतनी ही विकसित होती तो वो अपना भला खुद ही कर लेता । और हम सब भी इसी समाज से निकले है कम या ज्यादा समाज की बुराईयां और कमियाँ हम सब में हैं। इन सबसे पर्सनल लोड न ले । मजाज़  की सुने

बड़ा मुश्किल है दुनिया का सँवरना
तेरी जुल्फ़ों का पेच ओ ख़म नही है।

 

सँवारने की कोशिश करे पर ज़्यादा लोड न ले

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