मुद्दे विज्ञान-टेक्नोलॉजी

शुक्राणुओं की संख्‍या बढ़ाने में कैसे मददगार है आपका शारीरिक ताप ?

बॉक्सर पहना जाए कि ब्रीफ़? कौन सा अण्डरवीयर-डिज़ायन शुक्राणु-निर्माण के लिए बेहतर है? मौसम गरम हो तो शुक्राणु कम बनेंगे? सर्दी में उनका उत्पादन अधिक होगा? पहली बात कि यह सच है कि पुरुष के वृषण-कोष या स्क्रॉटम जितना मुख्य देह के समीप रहेंगे, उतना उनका ताप शरीर-जैसा होगा। शरीर जैसा यानी 37 डिग्री सेल्सियस […]

मुद्दे सोशल

मीडिया को बीफ से इतना प्यार क्यों हैं ?

जुनैद ट्रेन से अपने घर जा रहा था कुछ असामाजिक तत्वों ने सिर्फ इसलिए उसे निशाना बनाया कि वो मुसलमान था। अगले दिन ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ ने इस घटना को बीफ की तरफ मोड़ दिया। जबकि बीफ का इस घटना से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं था, ना ही ऐसी कोई अफवाह ही उड़ी […]

मुद्दे सोशल

भारतीय राजनीति: जातिवाद की सवारी

क्या हमारे लिए यह गंभीर चिंता का विषय नहीं होना चाहिए कि जिस जाति-विहीन समता-मूलक समाज को खड़ा करने का संकल्प लेकर स्वाधीन भारत ने अपनी यात्रा प्रारंभ की थी, वही जाति-समस्या आज हमारे सार्वजनिक जीवन का केंद्र बिंदु बनी हुई है ? ऐसा क्यों हुआ ? जिस जाति संस्था को हम जड़-मूल से मिटा […]

मुद्दे सोशल

कैसे होगा जाति का विनाश ?

जाति विनाश अगर सवर्णों से अपेक्षित है तो ये व्यर्थ का प्रोजेक्ट है। लेकिन जाति विनाश दलितों-पिछड़ों से अपेक्षित है तो इस प्रोजेक्ट से बहुत उम्मीद की जा सकती है। जाति विनाश कैसे होगा इसकी विस्तार से चर्चा करने से पहले दो वक्तव्य याद रखिये। महान आयरिश लेखक, विचारक और नाटककार जार्ज बर्नार्ड शॉ से […]

मुद्दे सोशल

भारत और पाकिस्तान की मेहनतकश अवाम से अपील

आज युद्ध का उन्माद जोरों पर है। प्रत्येक न्यूज चैनल, अख़बार खबरें ऐसे पेश कर रहे हैं जैसे युद्ध चल रहा है और वो युद्ध के मैदान से लाइव कवरेज जनता को दिखा रहे हैं, जैसे महाभारत के सीरियल में संजय धृतराष्ट्र को सुना रहा है। युद्ध की पल-पल की खबरें। महाभारत की कथा के […]

मुद्दे सोशल

आरक्षण की नई परिभाषा, संविधान को पुनः परिभाषित करने की तरफ इशारा

आरक्षण दो तरह से है- एक-शिक्षण संस्थाओं में एडमिशन के लिए और दूसरा सरकारी नौकरियों में। आरएसएस समर्थित भाजपा सरकार ने सरकारी नौकरियों को लगभग समाप्त करने की तरफ क़दम बढ़ाया है तो दूसरी तरफ शिक्षण संस्थनों में प्रवेश को लेकर सामान्य कैटेगरी को फिर से परिभाषित किया है। अब ‘जनरल’ या ‘सामान्य’ मतलब सवर्ण। इस […]

मुद्दे स्त्री-विमर्श

भूखी कमजोर महिला समाज को पसंद है, संघर्षरत महिला से डर लगता है

दुनिया के सबसे मजबूत लोकतंत्र की सबसे शर्मनाक और दर्दनाक हार इरोम और 90 वोट। 12 मार्च को इरोम शर्मिला चानू नाम के फेसबुक पेज पर एक स्टेटस लिखा जाता है, ‘Thanks for 90 Votes.’14 मार्च को इरोम का जन्मदिन था और लोगों ने उनके जन्मदिन से पहले ही उनको एक ऐसा ऐतिहासिक गिफ्ट दिया […]

खेल-मनोरंजन

डरमिट रीव ने जब जयसूर्या को कहा, तुम्हारी वजह से मेरा कैरियर खत्म हो जाएगा

2014 में रैडिट पर एक कमैंटेटर ने सवाल डाला, “what is the most absurd myth you have heard in cricket.” पहला रिप्लाई पैट ने किया “मैं जब बहुत छोटा था तो सुना था कि जयसूर्या ने अपने बैट में मैटल स्प्रिंग लगा रखे हैं जिसकी वजह से उनके शॉट बाऊंड्री तक उड़ते हुए जाते हैं।” […]

मुद्दे स्त्री-विमर्श

क्योंकि बाकी लोगों ने रिएक्ट नहीं किया तो मतलब छेड़खानी हुई ही नहीं

पहला दृश्य: एक लड़का और लड़की पार्क में बैठे हैं। लड़के का हाथ लड़की की छाती के पास है। लड़की की सहमति है और वो सहज है।आसपास के लोग उन्हें ‘घूरकर’ देखते हुए आ जा रहे हैं। तभी भारतीय संस्कृति के तथाकथित रक्षक वहाँ पहुँचते हैं और उस ‘रोमियो’ को ‘सबक’ सिखाकर ‘संस्कृति’ को तार-तार […]

मुद्दे व्यंग

चित भी मेरी पट भी मेरी बिकॉज़ ‘इट इज माय गेम माय रूल’  

रविश जी का स्टेटस पढ़कर निराशा ज्यादा होने लगी है आजकल। पहले बॉलीवुड की फिल्म देख कर लगता था कि कहाँ से कॉपी कर के लाते है ये लोग ऐसी फिल्में। कभी सोचा नहीं था कि बॉलीवुड की फिल्मों की कॉपी हुआ करेंगी। नायक फिल्म की कॉपी करके केजरीवाल जी आ गए। अब रविश जी […]