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अखबारी रिपोर्ट और फॉरवार्डड व्हाट्स एप मैसेज में फर्क मिटता जा रहा है

सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज एक महत्त्वपूर्ण सरकारी विभाग है, जो इनकम टैक्स सहित तमाम प्रत्यक्ष करों की वसूली अदि के लिए जिम्मेवार है।

ऐसी जिम्मेवार संस्था अगर प्रेस कांफ्रेंस करके कहे कि टैक्स रिटर्न की फाइलिंग में 24% की बढ़ोतरी हुई है तो आप क्यों अविश्वास करेंगे?

देश के कुछ नामी-गिरामी अखबार अगर इसे हाल के दिनों में हुई सबसे बड़ी बढ़ोतरी घोषित करें तो आप क्यों अविश्वास करेंगे? ToI ने मुख्य पृष्ठ पर उपशीर्षक लगाया- “Sharpest Rise in Recent Times- Says Tax Official.”

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कुछ ही घंटों के भीतर आपके सामने तथ्य आने लगते हैं कि इसी सरकार के एक मंत्री जयंत सिन्हा ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में सूचना दी थी कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में कुल 2.86 करोड़ लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया था। इस मेहनती सरकार के आने के बाद वित्तीय वर्ष 2015-16 में इनकम टैक्स फाइल करने वाले लोगों की सँख्या घटकर 2.27 करोड़ हो गई और फिर इस साल 2.83 करोड़ लोगों के रिटर्न फाइल किया है।

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तो अगर 2012-13 से इस साल की तुलना की जाए तो संख्या बढ़ी नहीं है, बल्कि कुछ घटी हुई ही है। 2012-13 में मेहनती सरकार सत्ता में नहीं थी। तो कुल कहानी यह है कि पहले तो स्थिति को बदतर हो जाने दो और फिर उस बदतर स्थिति से तुलना करके अपनी सफलता का ढिंढोरा पीटो।

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सबसे चिंताजनक है CBDT जैसी संथाओं का अपनी साख को दाँव पर लगाना। और अखबारों का क्या कहेंगे। यह सामान्य समय नहीं है।अखबारी रिपोर्ट और फॉरवार्डड व्हाट्स एप मैसेज में फर्क मिटता जा रहा है।
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सम्बंधित लिंक :
1- http://www.moneylife.in/article/how-true-is-cbdtrsquos-claim-of-record-new-tax-filers/51290.html
2- https://storify.com/jamewils/really-demonetisation-force-more-people-to-file-re

 

(लेखक- मनोज कुमार)