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आज दीवाली पर जीएसटी की भी पूजा

हिन्दुओं में मान्यता है कि लक्ष्मी – सरस्वती साथ नहीं रहती हैं। जीएसटी के साथ सबसे बड़ी समस्या यही है कि बिना बुद्धि वाला कोई भी धनपशु जीएसटी समझेगा ही नहीं। और अपने से ज्यादा जानकार सरस्वती पुत्र के भरोसे अपने वित्तीय राज रखेगा नहीं। कायदे से लक्ष्मी जी किसी सरस्वती पुत्र को पर्याप्त धन दे दें तो कोई समस्या नहीं होगी।

बड़े कारोबारियों को इसीलिए कोई दिक्कत नहीं है। चार्टर्ड अकाउंटैंट बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में होते हैं। उनलोगों ने तरीका ढूंढ़ लिया है। इसीलिए, मैंने भी तय कर रखा था कि कोई बड़ी कंपनी बनाई तो किसी मित्र सीए को बिना पैसे लिए शेयर दूंगा और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में जरूर रखूंगा पर लगता है लक्ष्मी जी मुझसे इसीलिए नाराज चल रही हैं कि मैं उनके आने से पहले ही किसी को देने के लिए सोचे बैठा हूं।

 

जीएसटी भाजपा को ले डूबेगा

अगर यह सिर्फ मेरे लिए सत्य है (और कोई कारण नहीं है, मेरा काम अचानक बंद हो जाने का) तो जीएसटी हिन्दू मान्य़ताओं का क्या करने जा रहा है, आप समझ सकते हैं। मेरी तो बहुत आस्था नहीं है पर जिनकी है वो नहीं मानेंगे तो 2019 के नतीजे का इंतजार करें। मैं जैसा सोच रहा हूं वैसा नहीं हुआ तो मेरा क्या है – मेरी आस्था तो नहीं है, नहीं रहेगी। जिसकी है वो सोचे। जीएसटी अगर जैसा है वैसे पूरी तरह लागू हो गया तो ये लक्ष्मी-सरस्वती को लड़ा ही देंगे। मेरे हिसाब से तो जीएसटी और भाजपा की सरकार में से कोई एक इसीलिए नहीं चलने वाला। जीएसटी भाजपा को ले डूबेगा। नोटबंदी का असर है ही जिसने कई लक्ष्मियों को दुखी किया है। और अगर ऐसा नहीं हुआ तो हिन्दुओं को मान लेना चाहिए कि धन लक्ष्मी नहीं देती हैं।

 

जरा सी बेवकूफी (दूसरे की भी) से आपकी अच्छी-खासी बचत भी बेकार जा सकती है

लक्ष्मी हाथ के मेहनत से आती हैं, दिमाग चलाने से आती हैं और योग्यता हो तो उसके उपयोग-प्रदर्शन से आती हैं। कमल के फूल के भरोसे नहीं आती हैं। लक्ष्मी आएं इसके लिए जरूरी है कि हाथ से काम करें। लक्ष्मी जी की फोटो पर कमल का फूल चढ़ाएं या न चढ़ाएं। पर कमल के फूल में उनके आकर बैठने का इंतजार न करें। जरा सी बेवकूफी (दूसरे की भी) से आपकी अच्छी-खासी बचत भी बेकार जा सकती है और फिर अगले साल आप उस बर्बादी के लिए अफसोस करें, लक्ष्मी को कोसें – इसका कोई मतलब नहीं है।

नोटबंदी के बाद के महीनों में मैंने कई महिलाओं से सुना कि उनके पास पर्याप्त पैसे थे पर वे पति को बताये बगैर बदलवा नहीं पाईं। इस तरह, मुश्किल से बचाए पैसे उनके हाथ से निकल गए। इनमें पढ़ी लिखी धन पशुओं की पत्नी से लेकर अनपढ़ नौकरानियां सब शामिल हैं जो कभी जरूरत पर काम आने के लिए जहां काम करती थीं उनसे पैसे नहीं लेती थीं या कम लेती थीं। पर नोटबंदी के समय उनलोगों ने हाथ खड़े कर दिए। पति ने सवाल उठाए सो अलग कि इतने पैसे कहां से आए? कैसे बचाए या कमाए? इसमें लक्ष्मी जी की क्या भूमिका?

 

हिसाब लगाइए पिछले साल की तुलना में इस साल आपकी स्थिति बेहतर है, खराब हुई या वैसी ही है

मुझे नहीं लगता है कि जीएसटी में आमूल-चूल परिवर्तन या इसे खत्म किए बगैर देश में आम आदमी की अर्थव्यवस्था में कोई सुधार आने वाला है (नौकरी करने वाले जिन लोगों की नौकरी बची और बनी हुई है उन्हें छोड़कर)। और अगर आपकी आस्था लक्ष्मी पूजा में है तो हिसाब लगाइए पिछले साल की तुलना में इस साल आपकी स्थिति बेहतर है, खराब हुई या वैसी ही है। अगर अच्छे से पूजा करने के बावजूद खराब हुई है या बेहतर नहीं हुई है तो इसका कारण आप लक्ष्मी जी को मानते हैं कि पूजा में किसी कमी को। जाहिर है पूजा आपने वैसे ही की होगी जैसे पहले करते थे। अगर कोई कमी बेसी रह भी गई हो तो क्या पिछले साल की पूजा सबसे खराब थी जो इस बार आपकी और मेरी हालत अभी तक के वर्षों में सबसे खराब है। जाहिर है, आर्थिक स्थिति खराब या अच्छी करने में लक्ष्मी जी और उनकी पूजा की भूमिका (कम से कम अब) नहीं होती है।

धन संपदा के मामले में भाजपा के मुकाबले बहुत पुरानी पार्टी – कांग्रेस, भाजपा से पीछे है

इसलिए, देखिए जीएसटी का कैसे कुछ हो सकता है। जीएसटी का विरोध करने वाले कैसे इसके पैरोकार बन गए। आंख कान खुले रखिए और जो कोई कह दे, अखबार में छप जाए या टीवी एंकर बोल दे उसे आंख बंद करके स्वीकार मत कीजिए । उस पर विचार कीजिए, लोगों से चर्चा कीजिए। दीवाली के पहले यह खबर ऐसे ही नहीं आई होगी कि धन संपदा के मामले में भाजपा के मुकाबले बहुत पुरानी पार्टी – कांग्रेस, भाजपा से पीछे है। 70 साल कुछ नहीं किया तब भी। भ्रष्ट, बेईमान साबित कर दी गई है, तब भी। भाजपा अपनी तमाम ईमानदारी और काम करने, काला धन लाने के जुमलों के साथ पैसे भी कमा रही है। देखिए समझिए आर्थिक स्थिति का संबंध राजनीति से तो नहीं है। जीएसटी, नोटबंदी से तो नहीं है? हैप्पी दीवाली। हैप्पी जीएसटी।

 

(वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह  #GSTkaSach  नाम से एक पूरी सीरीज़ लिख रहे हैं , हम आपके लिए यथा संभव अधिक से अधिक लेख उपलब्ध कराएँगे )

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