मध्य मार्ग क्यूँ

किसी भी तरह की अतिवादिता के ख़िलाफ़ और सहज सामाजिकता के पक्ष में

भारत में विचारधाराओं का संतुलन बड़ी साज़िश के तहत बिगाड़ा गया है, भारतीय समाज की मूल विचारधारा मध्यमार्ग है … और जब दक्षिणपंथ मजबूत हो रहा था तो उसी अनुपात में वामपंथ को मजबूत होना था ..मगर यहाँ साज़िश हुई ..और दक्षिणपंथ ने वामपंथ का चोला धर लिया .. अब देश को एक असंतुलित वैचारिक लड़ाई लड़नी पड़ रही है जहाँ मध्यमार्गी आम आदमी को अकेले तीन स्तरों पर दक्षिणपंथ से जूझना पड़ रहा है.

मीडिया को आम आदमी की आवाज़ बनना था मगर वह सत्ता के आगे दण्डवत है। एक ऐसा निर्वात हर क्षेत्र में नज़र आ रहा है जो डरावना और बेहद ख़तरनाक़ है। हमारी छोटी सी कोशिश है मीडिया के इस निर्वात को थोड़ा सा भर पाने की। हम बाबा साहब अम्बेडकर के देश की कल्पना को महात्मा गाँधी के साधन और साध्य वाली हिदायत के साथ साकार करने की दिशा में जितना हो सके अपना योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Why Madhya marg ?

Madhyamarg is a voice against any kind of extreme liberty and in favor of innate socialism.

In the context of India, the balance of ideology has been spoiled under intense intrigue, the basic ideology of Indian society is in the middle path (madhyamarg). When the right wing was strengthening then the left should be been strengthen in the same proportion. But there planned and schemed conspiracy happened, right took the mask of left. Now the country has to fight an unbalanced ideological battle where middle-aged common man is facing the right path at three levels alone.

The media had to become the voice of the common man, but it only bows down to power. Such a vacuum is seen in every area, which is scary and extremely dangerous. Our little effort is to get this vacuum of media to fill a gap. We are committed to giving our imagination to Baba Saheb Ambedkar’s country with the means and resources of Mahatma Gandhi to make his contribution as much as possible.

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