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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और SCAORA ने खोला CJI रंजन गोगोई के खिलाफ मोर्चा

शुक्रवार को गुड फ्राइडे की छुट्टी के दिन 22 जजों के पास एक एफ़िडेविट पहुंचा. इस एफ़िडेविट में सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण और पुलिस यातना के गंभीर आरोप लगाये हैं.

शनिवार को चीफ जस्टिस ने एक विशेष बेंच बैठा कर अपने आपको आरोपों से बरी कर दिया. न्याय के किसी भी सिद्धान्त के विपरीत आरोप के घेरे में आये चीफ जस्टिस गोगोई ने खुद ही इस बेंच की अध्यक्षता कर ली. उन्होने अपने उपर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच की बजाय इसे न्यापपालिका की स्वायतत्ता से जोड़ दिया और किसी “बड़े हाथ” की साजिश बता दिया. इतवार की शाम तक सरकार की तरफ से वित्त मंत्री अरुण जेटली भी चीफ जस्टिस के समर्थन में उतर आये.

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ने CJI रंजन गोगोई द्वारा जिस तरह इस मामले को निपटाने की कोशिश की गयी उसके ख़िलाफ़ बयान जारी किया है. SCAORA ने इसकी कठोर निंदा की है और इस मामले में जाँच और कार्रवाई की मांग की है. और आगे यह भी मांग की है कि तुरंत के कमिटी गठित की जाए जो CJI पर लगे आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करे.

ज्ञात हो कि SCAORA उन वकीलों का एसोसिएशन है जो कम से कम 5 साल सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस पूरी कर चुके होते हैं. एसोसिएशन सामान्यतः जज के साथ इत्तेफ़ाक़ रखता है लेकिन यह एक ऐतिहासिक मामला है जहाँ SCAORA ने इस तरह CJI के खिलाफ मोर्चा खोला है.

इसके साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी अपना स्टैंड साफ़ करते हुए अपने रिज़ॉल्यूशन में कहा है कि CJI पर सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी ने जो आरोप लगाए हैं, उसके लिए CJI द्वारा जो प्रक्रिया अपनायी गयी वह स्थापित कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ है, और यह प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय सिद्धांत विरोधी भी है.

बार एसोसिएशन की कारकारी समिति ने न्यायलय से मांग राखी कि इस मामले में जो भी उचित प्रक्रिया हो उसके अनुसार आगे ज़रूरी क़दम उठाए जाएं.

SCAORA और बार एसोसिएशन के इस तरह से इस पूरी प्रक्रिया में CJI के विरोध में खड़े हो जाना सामान्य घटना नहीं है और इसका दबाव न्यायलय पर अवश्य पड़ सकता है. आज इस मामले में तीन जजों की बेंच द्वारा सुनवाई होनी है जिसमे कहा जा रहा है कि आगे CJI के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.