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अफीम खेती के लिए बदल दिए सरकार ने लाइसेंस देने के नियम

नीमच। सरकार के गजट के नए नोटिफि‍केशन के अनुसार किसानों को अफीम की फसल के लाइसेंस देने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।सरकार द्वारा 18 अक्टूबर को किये गए गजट नोटिफिकेशन के अनुसार वर्ष 2017-18 के लिए नीति के तहत पात्र घोषित किये गए किसानों को केवल 10 आरी क्षेत्र के लिए ही लायसेंस मिलेंगे।इसका प्रभाव यह होगा होगा कि देश में अफीम उत्पादन का क्षेत्र लगभग 40 प्रतिशत कम हो जाएगा।

19 अक्टूबर केंद्रीय राजस्व विभाग ने अफीम फसल वर्ष 2017-18 के लिये देश की नयी अफीम नीति की घोषणा कर दी है।इसके तहत जिन किसानों ने वर्ष 2016-17 में प्रति हेक्टेयर 5.9 किलोग्राम मार्फिन का औसत उत्पादन सरकार को दिया है और जो नीति के अन्य प्रावधानो के अनुसार पात्र है उनको इस साल फिर से 10 आरी क्षेत्र में अफीम उत्पादन का लायसेंस दिया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि देश में मध्यप्रदेश,राजस्थान और उत्तरप्रदेश में सरकार द्वारा घोषित नीतिगत प्रावधानों के अनुसार पात्र घोषित होने वाले किसानों को अफीम उत्पादन का लायसेंस दिया जाता है। पिछले वर्ष 2016-17 में तीनों राज्यों के लगभग 10 हज़ार किसानों को करीब 10 हज़ार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पात्रतानुसार 20 और 12 आरी क्षेत्र के लायसेंस दिए गए थे।

इस नीति के जरिये देश में पहली बार लायसेंस की पात्रता के लिए मार्फिन के औसत उत्पादन को आधार बनाया गया है।पिछले वर्ष तक प्रति हेक्टेयर अफीम के औसत उत्पादन के आधार पर लायसेंस दिए जाते थे।पात्रता का आधार बदलने से भी कई किसान प्रभावित होंगे।
सरकार के पास अफीम का 550 टन से भी अधिक का स्टॉक पड़ा है और निर्यात एवम् ड्रग्स उत्पादन के लिए सालाना 225 टन अफीम से अधिक की जरूरत ही नही है।इसीलिए यह अपेक्षित ही था कि सरकार नीति में बदलाव कर अफीम उत्पादन का रकबा कम करेगी।

संशोधन-समाचार में गलती से तीनों राज्यों में वर्ष 2016-17 में 10 हज़ार किसानों को लायसेंस दिए गए थे यह टाईप हो गया है सही स्थिति यह है कि लगभग 60 हजार किसानों को लायसेंस दिए गए थे।

 

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