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राया सरकार ने जारी की यौन उत्पीड़न करने वाले 68 प्रोफेसरों की सूची

नई दिल्‍ली। 24 वर्षीय लॉ स्टूडेंट राया सरकार ने सोशल मीडिया पर भारत के यौन शिकारियों की सूची आम करनी शुरू करके शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। राया कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में कानून में मास्टर्स कर रही हैं। राया पहले भी मर्दवाद पर कड़ी टिप्पणी करने के लिए जानी जाती हैं। जब उन्होंने यह शुरू किया तो उन्हें पता था कि वह कई युवा लड़कियों  के लिए एक मुश्किल लड़ाई लड़ने जा रही हैं। यह मामला दिन प्रति दिन बड़ा और गंभीर रूप लेता जा रहा है। रोज़ कुछ नए और चौंकाने वाले नाम सामने आ रहे हैं। लेकिन मीडिया में इस बात को लेकर कोई खास सुगबुगाहट नहीं दिख रही। खासकर हिंदी मीडिया में।

 

दीपेश चक्रवर्ती द्वारा क्रिस्टीन फेयर के यौन उत्पीड़न के मामले से प्रेरित, इस सूची में अब तक लगभग 70 नाम सामने आ चुके हैं। जिनमें से कई भारत और विदेशों में सामाजिक विज्ञान में बड़े नाम हैं।

अमेरिकी मीडिया सर्कल में ज़ारी होने वाली इसी तरह की एक सूची के विपरीत, यह सूची गुमनाम रूप से प्राप्त नहीं की गई है। सरकार का दावा है कि सूची में नाम मुख्य रूप से उन महिलाओं द्वारा सीधे लिए गए हैं जिन्हें कथित रूप से यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया है। कुछ मामलों में, जहां पीड़िता ने नाम न छापने का अनुरोध किया गया है वहां नहीं छापा गया। सरकार का कहना है कि उन्होंने चैट्स, व्हाट्सएप संदेश, ई-मेल, कॉल रिकॉर्ड्स के स्क्रीनशॉट्स को इकट्ठा किया है जो पीड़ितों के साक्ष्य की पुष्टि करते हैं।

 

 

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की छात्रा रही राया सरकार का मानना ​​है कि उनकी सिंगापुर की राष्ट्रीयता और अमेरिका में निवास होने की वजह से उन्हें संभावित मुश्किलों से काफी हद तक बचाव हो जायेगा।

 

सूची के प्रकाशन के तुरंत बाद से ही लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। सरकार का कहना है कि सैकड़ों मित्र और अजनबी उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में कथित यौन उत्पीड़न और उत्पीड़न के अपने अनुभवों को जोड़ने के लिए संदेश भेज रहे है। उसकी पोस्ट सैकड़ों लोगों द्वारा साझा की गई है और इसमें कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है कि उन्हें काफी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है।

 

 

निवेदिता मेनन, कविता कृष्णन और आयशा किदवई सहित कई प्रमुख भारतीय शिक्षाविदों द्वारा एक बयान में सरकार के तरीकों की आलोचना की गयी है। जिसमें कहा गया है कि यह सूची “यौन उत्पीड़न के खिलाफ लंबे संघर्ष को कमज़ोर कर सकती है, और अपने काम को नारीवादी के रूप में और अधिक कठिन बना सकती है”।

 

इसपर राया सरकार ने अपनी टिप्पणी कुछ यूँ दी।

“जाहिरा तौर पर सवर्ण ब्राह्मण महिलाओं ने ‘Name and Shame’ अभियान के खिलाफ कफिला (लॉरेंस लिआंग द्वारा संचालित, मेरी सूची में भी) पर एक बयान जारी किया है। सबसे पहले तो यह शर्मनाक अभियान नहीं है, क्योंकि पुरुष (और आप सभी) बेशर्म हैं। यही वजह है कि ये इतना लम्बा चला। दूसरा, यह पीड़ितों से सीधे लिए गए अनुभव हैं जिन्हे छात्रों को प्रोफेसरों से सावधान रहने के लिए सूची बद्ध किया गया है। नहीं सुनना यह आगे उत्पीड़न को रोकने के लिए है
और अंत में, मुझे आशा है कि यह पर्याप्त रूप से अपनी बात स्पष्ट करता है कि क्यों सबसे ज़्यादा पीड़ित कभी बात नहीं करते हैं या नाम नहीं देना चाहते हैं। क्योंकि उन्हें परेशान करके चुप करा दिया जाया है। मैंने कफीला पर इनका  बयान नहीं देखा है और न ही यौन उत्पीड़न  के लिए माफी मांगने जैसी बात में कोई दिलचस्पी है। लेकिन मुझे यकीन है कि अभियान के दौरान उन सभी ने #MeToo चलाया लेकिन अपने ब्राह्मण भाइयों , प्रेमियों और पतियों की रक्षा के लिए चलाया। … यही है जिसे करने के लिए इन्हे सदियों से कंडीशंड किया गया है। #FekuFeminism”

 

 

राया ने तारााना बुर्के का भी ज़िक्र किया है जिन्होंने #MeToo अभियान शुरू किया था। वो पीड़ितों के साथ हैं , ताराना अमेरिका में एक अनुभवी नारीवादी हैं। और भी ऐसे कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने पीड़ितों का समर्थन किया है।  उनका कहना है कि हमारी कोशिश है कि अधिक से अधिक लोगों को FIR करने के लिए प्रेरित किया जा सके। राया कहती हैं कि उन्हें किसी से किसी बात का कोई डर नहीं है।  किसी को उनके खिलाफ मानहानि का केस करना हो तो कर सकता है ,वे पूरी तरह तैयार हैं।

 

 

 

न्यूज़ बज़ फीड ने लिखा है कि इस सूची से जुड़े बहस में कई आयाम हैं – ऐसी सूची बनाने की नैतिकता, इसका विरोध करने वालों का विशेषाधिकार, और भारतीय संस्थानों में ऊपरी जाति के लोगों का अनकहा वर्चस्व। राया सरकार के साथ हुई बातचीत के कुछ अंश यहाँ पर दे रहे हैं।

 

आपने इस सूची को बनाने का निर्णय क्यों लिया ?

लोग पीड़ितों से पूछते हैं कि अब क्यों ? 20 साल बाद क्यों ? और आरोपों को खारिज करने के लिए एक कारण के रूप में इसका इस्तेमाल करते हैं। लोगों को काम करने की जगहों के सत्ता और पवेर के साथ सम्बन्धों को समझने की जरूरत है जो पीड़ितों को बोलने से रोकते हैं। मैं यह अब क्यों कर रही हूँ ? क्योंकि मुझे लगता है कि हार्वे वेन्स्टाइन के मामले में काफी चर्चाएं शुरू हुई थीं। और अब लोग ‘निर्दोष साबित होने तक झूठे’ की  बजाय विश्वास करने के लिए अधिक खुले हैं। #metoo अभियान ने मुझे ऐसा करने के लिए प्रेरित किया। यह सूची मुख्य रूप से छात्रों को उनके प्रोफेसरों से सचेत करने के लिए है। क्योंकि मेरी राय में उत्पीड़क यह जानते हैं कि कॉलेज प्रशासन कैसे काम करते हैं इसलिए वो सत्ता के अपने पदों को बचाये रखेंगे।

 

आपकी फेसबुक पोस्ट ने काफी हिला दिया है।  यह सैकड़ों लोगों द्वारा साझा किया गया है और काफिला पर प्रमुख नारीवादियों द्वारा इसके खिलाफ एक बयान भी आया है। क्या आप चिंतित हैं कि आप पर कानूनी तौर पर मानहानि के आरोप लग सकते हैं ?

यह आश्चर्य की बात नहीं है कि सूची का स्वागत अच्छी तरह से नहीं हुआ। यहां तक ​​कि नारीवादियों द्वारा भी नहीं जो शक्तिशाली पदों पर हैं। आखिरकार डोना करन (अमेरिकी फैशन डिजाइनर), जो स्व-घोषित नारीवादी है उन्होंने अपने मित्र हार्वे वेंस्टीन को बचने के लिए पीड़िता के कपड़े को दोषी ठहराया जो उसने पहने हुए थे। मुझे लगता है कि ज्यादातर ‘शैक्षणिक नारीवादियों’ द्वारा प्रतिक्रिया समान रही है। छात्रों ने बताया है कि प्रोफेसर उन्हें लगातार कह रहे है कि वे मुझसे उनके नाम हटवाएं तो वे उन्हें ऑक्सफ़ोर्ड छात्रवृत्ति दिलाएंगे। मुझे नहीं पता कि क्या वे मानहानि के आरोपों लगाने का निर्णय लेंगे या नहीं। मुझे लगता है कि यह इसके लायक है क्योंकि मेरी सूची अधिक पीड़ितों को उत्पीड़ित होने से बचा लेगी।

 

आपको बहुत अधिक सहायता प्राप्त हुई है, खासकर युवा महिलाओं से। क्या आप इतने लोगों की संख्या पर हैरान हैं जिन्होंने आपने अपने अनुभव साझा किए हैं?

लोगों की एक बड़ी संख्या ने इस सूची को साझा किया है और अभियान का समर्थन किया है और पीड़ितों पर विश्वास जताया है। मैंने विभिन्न महिलाओं के 300 से अधिक संदेश प्राप्त किए हैं। अक्सर वो अपने खिलाफ यौन उत्पीड़न के लिए एक ही प्रोफेसर पर आरोप लगाती हैं। मुझे बहुत खुशी है कि भारत में कई लोग हैं – पुरुष, महिलाएं और गैर-पुरुष – जो यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों पर विश्वास कर रहे हैं। जिन्होंने मेरे लिए रिपोर्ट करने की खातिर अपने करियर को खतरे में डाल दिया है

 

आपकी सूची में से कई पुरुष स्वघोषित नारीवादी हैं उन्होंने प्रणालीगत विशेषाधिकार और संरचनात्मक असमानता के बारे में बात की है। फिर भी ऐसा लगता है कि उनके स्वयं के सामाजिक विशेषाधिकार ने उन्हें जवाबदेह बनाए रखने से रोक लिया। ख़ास तौर से बुद्धिजीवी।

यह भयावह है लेकिन यह आश्चर्यजनक नहीं है कि सत्ता सत्ता को बचाने की कोशिश कर रही है। लेफ्ट और राइट दोनों। अधिकांश प्रोफेसर ब्राह्मण या सवर्ण हैं। इसके अलावा, यह ब्राह्मण पितृसत्ता और ब्राह्मण व्यवस्था जो इन्होने बनायी है जिसे बचाने के लिए वे उन लोगों को चुप कराते हैं जो इसे तोडना चाहते हैं।

अब इस सूची का आगे क्या करना है? क्या आप उम्मीद करती हैं कि इसपर कोई कार्रवाई हो सकती है?

विश्वविद्यालय के प्रशासकों द्वारा छात्र विरोध प्रदर्शन या तेज निर्णय कहें, सूची को किसी संस्थागत कार्रवाई के लिए तैयार नहीं किया गया है। इसे छात्रों के लिए एक चेतावनी सूची के रूप में तैयार किया गया है। पीड़ितों को खुद अदालतों या किसी मंत्रालय से मिलना चाहिए। मैंने मेरे दोस्त अरोह अकथ, जो अंबेडकर यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली में एक छात्र-एक्शन कमेटी के सदस्य हैं, और एक पीड़िता को दो प्रोफेसरों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिएतैयार किया है। यह चौंकाने वाला है कि सबसे ज्यादा पीड़ित शिकायत दर्ज नहीं करना चाहती हैं कि कहीं उन्हें धमकाया न जाए,और उनके अकादमिक समुदायों से अलग न कर दिया जाए।

 

यह है वह सूची जो राया ने बनायी है-

One sexual harasser is Dipesh Chakravarty, the other is Kanak Sarkar Prof. teaching political science at Jadavpur University. If any one knows of academics who have sexually harassed/were sexually predatory to them or have seen it first hand PM me and I’ll add them to the list.

Added: 3) Prasanta Chakravarty, Delhi University English Dept.

4) Partha Chatterjee, political theorist and historian.

5) Ned Bertz, University of Hawaii/Ambedkar University, Delhi, History Dept.

6) Manas Ray, CSSS Calcutta.

7) Prodosh Bhattacharya, Jadavpur University, JUDE

8) Bidyut Chakravorty, DU Political science Dept.

9) Rajarshi Dasgupta, CPS, JNU

10) Koushik Roy, Jadavpur University, JUDEPHIS

11) Sumit Kr. Baruah, Jadavpur University, JUCL

12) Nilanjan Dutta, Film and Television Institute (FTII) editing Dept.

13) Sandeep Chatterjee, Direction dept FTII

14) Mitul Baruah, Ashoka University

15) RC Natarajan, former Director, Inistitute of Rural Management Anand (IIRMA), Gujarat

16) Ali Ahmed Idrisi, Delhi Univerity

17) Partha Mukherjee, St Xavier’s College, Kolkata

18) Shyamal Karmakar, HOD of editing dept, Satyajit Ray Film and Television Institute (SRFTI)

19) Shyamal Sengupta, ex HOD of producing, SRFTI

20) Shubhardra Chowdhury, SRFTI, Direction dept.

21) Arul Nambi, Teacher, Atomic Energy Higher Secondary Central School, Kudankulam, TN. ( Tamil poet and writer)

22) Mon Bose, TERI University, New Delhi, Dept of Economics.

23) Abhijit Gupta, Jadavpur University

24) Mridul Bose, Jadavpur University

25) Amit Abraham, famed psychologist, ex-principal of Scottish Church College Kolkata.

26) Gopal Balakrishnan, University of California Santa Cruz and New Left Review.

27) Ankur Barua, University of Cambridge

28) Anup Dhar, Ambedkar University Delhi (AUD)

29) Ashok Nagpal, AUD

30) Wrick Mitra, AUD

31) Benjamin Zachariah, Presidency University, Calcutta/University of Trier, Germany

32) Biswajit Chatterjee, Jadavpur University, Dept of economics

33) Rabindra Sen, Jadavpur University, Dept of International Relations

34) Bhaswar Moitra, Jadavpur University, Dept of economics

35) Sagar Naik, DY Patil University, Hospitality and Tourism [ emotionally and physically assaulted male students]

36) Khalid Wasim, TISS Tuljapur.

37) Late MSS Pandian

38) Surinder S. Jodhka, JNU

39) Kanav Gupta, Delhi University

40) Parshaura Singh, UC RIverside

41) Lawrence Liang, AUD

42) Arghya Basu, ex Faculty FTII, Documentary Filmmaker

43) Jayant Dhupkar, EFLU, Hyderabad

44) BN Ray, ex-Vice President, Ramjas College, DU

45) Joydev Chottopadhyay, ISI Kolkata

46) Bilal Abid, NIFT Delhi

47) Gautam Chakravarty, Delhi University English dept

48) Pappu Venugopala Rao, Music Academy Madras

49) Ish Mishra, Hindu College, DU

50) Kaushik Basu, NLSIU Bangalore

51) Debmalya Chatterjee, JU Production Engineering dept.

52) Saroj Giri, Delhi University

53) Dara S. Amar, St. John’s Medical College Bangalore

54) Father Varghese, Christ University

55) Mihir Bhattacharya, founder of film dept and ex HOD, Jadavpur University [complainant, an ex-faculty publicly spoke about this, but wanted me to take off their name after being bullied]

56) Shibhashish Bose, JU, Architecture dept

57) Ahmer Anwar, Sri Venkateshwara college, DU

58) Debayudh Chatterjee, JUDE, DU research scholar

59) Shahnawaz Ali Rehan, student at Oxford and not professor but sexual harasser.

60) Ashley Tellis (B’lore)

61) Pravin Dusane from MES Abasaheb Garware college, Pune.

62) Sunil Kumar Roy, Gurudas College

63) Abhijit Mitra, guest lecturer at St Xaviers University, Calcutta

64) Sunil Bhadri, Manipal School of Communication

65) Arun Khopkar, film maker

66) Sadanand Menon, victim did not want institution to be named– but is a public personality, taught/teaches journalism.

67) PD Reddy, IIT Bhubaneswar

68) Subhadeep Paul, Bankura University

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