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‘ब्रह्मण’ समाज पुजारी से शादी करने वाली महिला को देगा 3 लाख रुपये

तेलंगाना। धर्मांधता और कर्मकांड भारत में बहुत गहराई तक फैले हैं। तकनीक और विज्ञान के इस युग में भी अंधविश्वास और कर्मकांड खत्मतो दूर कम होने का नाम नहीं ले रहा। बल्कि धर्मंधता को बढ़ावा देने के नए-नए नियम बनाए जा रहे हैं। ऐसे ही देखने को मिला तेलंगाना में।

पुजारी से शादी करने पर दिए जाएंगे 3 लाख रूपये

यहाँ घोषणा की गई है कि जो महिला पुजारियों से शादी करेगी उसे तीन लाख रुपये दिए जाएंगे। यह घोषणा तेलंगाना ब्राह्मण कल्याण संगठन ने की है। घोषणा के बाद इस पर समाज के विभिन्न वर्गों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।

बीबीसी में छपी एक खबर के अनुसार अपने इस फ़ैसले के समर्थन में तेलंगाना ब्राह्मण कल्याण संगठन का कहना है कि पुजारियों को आर्थिक तंगहाली के चलते शादी के लिए दुल्हन ढूंढने में परेशानी हो रही है, और इसलिए उन्हें वित्तीय सहायता देने की घोषणा की गई है।

ब्राह्मण परिषद के अध्यक्ष केवी रमणाचारी कहते हैं, “मंदिर और संस्कृति तभी चलते रहेंगे जब तक पुजारी मौजूद हैं और फ़ैसले से यह समूचा समूह लाभान्वित होगा।”

संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जरूरी

“महा ब्राह्मण संघम” तेलंगाना के मुख्य सचिव अवधानुला नरसिम्हा शर्मा कहते हैं, “ग़रीब ब्राह्मणों की मदद करने और उनके कल्याण के साथ ही संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के फ़ैसले ज़रूरी हैं।”

तेलंगाना सरकार ने अपने बज़ट में ब्राह्मणों के कल्याण के लिए 100 करोड़ रुपये रखे हैं।

पुजारी ग़रीब हो सकते हैं, हालांकि, परिषद के इस फ़ैसले की समाज के कुछ वर्गों में आलोचना की जा रही है।

केवल वर्ग विशेष का हित

सामाजिक विकास परिषद की निदेशक कल्पना कन्नाभिरन के अनुसार, “इस तरह के फ़ैसले संवैधानिक भावना के अनुरूप नहीं हैं और परिषद प्रबंधन के निर्देशों के पीछे अपने फ़ैसले को छुपाने की कोशिश कर रही है। किसी की शादी राज्य की ज़िम्मेवारी कैसे हो सकती है? अगर कोई अकेला रह रहा हो तो क्या यह सरकार की समस्या है?”

उन्होंने सवाल उठाया कि विवाह से संबंधित इस मसले में आर्थिक मदद देकर राज्य के केवल एक वर्ग का ही हित देखा जा रहा है।

वो पूछती हैं, “संविधान के अनुसार, समाज के पिछड़े वर्गों के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए कल्याणकारी उपायों की ज़रूरत है न कि उन लोगों के लिए जो इस परिधि में नहीं आते। क्या शादियाँ बगैर पैसे के नहीं कराई जा सकतीं?”

हिंदू मैरिज एक्ट का उल्लंघन

कल्पना ने इस बात की भी आलोचना की कि इस तरह की योजनाएँ गिरते सामाजिक प्रचलन को दर्शाने के साथ ही समाज में जाति व्यवस्था की सामंती नींव को मज़बूत करती हैं।

इस विषय पर उच्च न्यायालय की वकील रचना रेड्डी कहती हैं, “यह योजना हिंदू विवाह अधिनियम का उल्लंघन करती है।”

सामाजिक कार्यकर्ता देवी कहती हैं, “इस योजना से ऐसा लग रहा है कि पुजारियों को दहेज दिया जा रहा है।”

इस बीच, ब्राह्मण परिषद ने कहा है कि वो एक सप्ताह में इस योजना के पूरे विवरण की घोषणा करेगी।

 

(टीम मध्यमार्ग)

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