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सवर्णों ने नहीं दिया पानी तो आदिवासी लड़के ने खोद दिया तालाब

कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक 42 साल के आदिवासी व्यक्त‍ि ने अकेले ही गांव के लोगों के लिए एक तालाब खोद डाला। सदियों से चलती आ रही कहावत कि ‘कोई स्वंय से कुआँ खोदकर पानी नहीं पीता’ आज इस लड़के के ज़ज्बे के आगे फीकी पड़ गई।

दशकों से अनदेखा कर रही थी सरकार

यह मामला सजा पहाड़ गाँव का है। जब श्याम लाल 15 साल का था तो वह देखता था कि उसके गाँव में पानी की बहुत किल्लत है। आस-पास के सवर्ण ग्रामीणों और आदिवासी लोगों को अपने यहाँ से पानी नहीं लेने देते थे। ग्रामीणों को खुद के लिए तथा अपने मवेशियों के लिए पानी का इंतजाम करने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि क्या करना है। क्योंकि सरकार भी उनकी परेशानी को सालों से अनदेखा कर रही थी।

शुरूआत में हँसते थे लोग

एक दिन श्याम लाल ने निर्णय लिया कि वह अपनी कुदाल से एक तालाब का निर्माण करने के लिए खुदाई करेगा। शुरूआत मे श्याम लाल के इस फैसले पर उसके गांव के लोग हँसते थे लेकिन यह आदिवासी नाबालिग लड़का अपने फैसले पर अड़िग रहा। श्याम लाल जंगलों में जाता और 27 साल तक उसने तालाब के लिए खुदाई करता था।

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माउंटेन मैन दशरथ मांझी की याद दिलाता है श्यामलाल

इस मेहनत का परिणाम बिहार के माउंटेन मैन दशरथ मांझी के महान कार्य और ज़ज्बे की याद दिलाता है। क्योंकि एक एकड़ में खुदाई कर श्याम लाल ने 15 फीट का गहरा तालाब खोद डाला, जो कि ग्रामीणों की जिंदगी में अमृत से कम नहीं है।

अपनी इस कामयाबी पर बात करते हुए अब 42 साल के हो चुके श्याम लाल ने कहा कि जब मैं खुदाई के लिए जाता था तो गाँव के लोग मुझपर हँसते थे।

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न तो किसी गाँव वाले और न ही किसी प्रशासन ने मेरी इस काम में मदद की। श्याम लाल ने कहा कि मैंने यह काम अपने गाँव के लोगों और उनके मवेशियों के लिए पानी का इंतजाम करने के लिए किया।

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(टीम मध्यमार्ग)

 

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