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केरल की पुलिस का ‘जातिवादी’ चेहरा

जब देश दूसरे अनुसूचित जाति के राष्ट्रपति के चुनाव का जश्न मना रहा था, देश के दक्षिण हिस्से में सबसे साक्षर राज्य से एक बेहद भयावह तस्वीर सामने आई।

खबर है कि एक 18 साल के अनुसूचित जाति के लड़के को राज्य पुलिस ने हिरासत में बहुत ही भयानक यातनाएं दी। जिसके बाद लड़के ने आत्नमहत्कीया कर ली, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इन यातनाओं की पुष्टि की गई है।

एक तरफ तो मंगलवार को रामनाथ कोविंद संसद के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रपति पद की शपथ ले रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उसी मंगलवार को विनायक नाम के लड़के पर हुए अत्याचार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई। जिसमें दावा किया गया कि उसपर शारीरिक अत्याचार हुआ है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उसकी छाती, सिर के पीछे, पेट और पैर की अंगुलियों में कई गहरी चोटें थीं। उसकी छाती पर साफ छह निशान थे, उसका दाहिना निप्पल टूटा हुआ था और उसकी पैर की अंगुली में जूतों से मारने की चोटें थीं, जिससे पता चलता है कि विनायक को पुलिस ने लात और जूतों से मारा है।

पुलिस इस मामले की किसी भी तरह की जाँच में पुलिस का बच रही है और मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। और वहीं इस शर्मनाक घटना के सामने आने के बाद सत्ता में बैठी कम्युनिस्ट पार्टि (मार्क्सवादी) एलडीएफ को कहीं भी छिपने की जगह नहीं मिल रही है। दलित एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता और लड़के के परिवार वालों का कहना है कि ”वह अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए आखिर तक लड़ेंगे।”

विनायक के पिता कृष्णन कुट्टी ने कहा कि “पुलिस हिरासत में किए गए अत्याचार और मारपीट के बाद की शर्मिंदगी ने मेरे बेटे को मरने को मजबूर कर दिया। इन लोगों ने मेरे बेटे की हत्या की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर देखेंगे तो साफ दिखता है कि कैसे पुलिस ने उसके साथ अत्याचार किया गया है। जब तक मैं विनायक पर अत्याचार करने वाले पुलिसकर्मियों को जेल नहीं भेज देता तब तक मैं आराम नहीं करूंगा। ”

यह 17 जुलाई की घटना है जब एक पुलिसकर्मी ने विनायक और उनके दोस्त शरथ को उठाया था जब वह बाईक अपनी ड्यूटी कर रहा था।

पुलिसकर्मी का दावा है कि पुलिस को उनपर ‘संदिग्ध गतिविधि’ करने का शक महसूस किया था और प्रत्यक्षदर्शियों कहना है कि जब पुलिस ने उन्हें रोका और अपने पीछे वाली सीट पर बैठने को कहा तब विनायक बस अपनी किसी महिला मित्र से बात कर रहे थे और उस दौरान शरत उसके पास खड़े थे। और उससे कहा कि वह उसके साथ पिलियन की सवारी करने के लिए कहता है। शरत को विनायकन की बाइक के साथ स्टेशन में उनका पालन करने के लिए कहा गया था। पुलिस ने शरत से विनायक की बाईक से स्टाशन आने को कहा।

विनायक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, जो कि बहुत छोटा-सा अपराध है जिसपर जुर्माना लग सकता है। कृष्णन का कहना है कि पवारटी पुलिस थाने में पुलिस उनके बेटे एक चालाक ‘चेन स्नैचर’ के रूप स्थापित करने की कोशिश कर रही थी।

कृष्णन ने कहा, “जब उन्होंने मुझे फोन किया तो उन्होंने फोन पर मुझसे कहा कि वह एक लड़की के साथ पकड़ा गया है। लेकिन जब पुलिस के दावे को मैंने मेरे खारिज कर दिया क्योंकि मुझे पता है कि लड़की उसकी दोस्त है तब उन्होंने कहा कि शायद वह ‘चेन स्नैचर’ है। यहां तक कि उन्होंने मुझे उन सबके सामने अपने बेटे को थप्पड़ मारने के लिए भी कहा। यह बहुत ही दुखद था।”

विनायक को उस दिन जल्दी ही उसके पिता के साथ छोड़ दिया गया था, लेकिन उसके दोस्त शरथ का दावा किया कि पहले ही बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया जा चुका था।

शरत ने मीडिया से कहा, “वे उसे मारते जा रहे थे और कह रहे थे कि अगर तुम इस बात को मान लोगे कि तुम इस इलाके के ‘चेन स्नैचर’ हो तो हम तुम्हें छोड़ देंगे। जो विनायक ने कुबूल नहीं किया।”

18 जुलाई को पुलिस स्टेशन से वापिस आकर विनायक ने आत्महत्या कर ली। परिवार का कहना है कि उनके बेटे ने उन्हें पुलिस द्वारा किए गए अत्याचार के बारे में नहीं बताया।

हालांकि परिवार को इस बात पर शुरूआत में बस शक ही था, लेकिन 25 जुलाई को पोसेटमार्टम रिपोर्ट से ही परिवार वालों को पता चला कि पुलिस ने उनके बेटे के साथ अत्याचार किया है।

कृष्णन ने कहा, “वह बहुत निराश और परेशान था। लेकिन हमने सोचा कि वह स्टेशन पर खराब अनुभव के कारण इतना परेशान है। उसने हमें कभी नहीं बताया कि उसको इस तरह पीटा गया था। इस घटना के बाद हो सकता है कि उसे इसमें बहुत ज़्यादा शर्म महसूस हुई हो।”

हालांकि राज्य पुलिस महानिदेशक ने इस घटना की जांच का आदेश दिया है और उन दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया, जो उस समय ड्यूटी पर थे। परिवार ने कहा है कियह कार्रवाई उन्होंने जो खोया है उसकी तुलना में बहुत कम है।

पुलिस यह कह रही है कि यातनाओं का कोई सबूत नहीं है इसलिए विनायक का परिवार स्थानीय अदालत में एक निजी शिकायत ले जाने की तैयारी कर रहा है। वहीं धीरे-धीरे विनायक के समर्थन में उसके गृह नगर में एक जन आंदोलन भी खड़ा होता दिख रहा है।

विनायक के पड़ोसी नारायण ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि “वह कानून तोड़ने वाला लड़का नहीं था। पुलिस ने भी साफ नहीं किया है कि उन्हें क्यों उठाया गया था। हम सभी इस मामले की गहराई तक जाएंगे। पुलिस इस तरह एक निर्दोष के साथ कैसे कर सकती है।”

एक प्रसिद्ध दलित कार्यकर्ता धनराम रमन ने कहा कि “ऐसा लगता है कि अगर कोई काले रंग का है और अनुसूचित जाति से आता है तो पुलिस की बर्बरता और बढ़ जाती है। विनायक के मामले में पुलिस ने उसकी जाति पूछने के बाद ही उसे मारा।

धनराम रमन ने पूछा कि किसी भी अपराध का जाति से क्या संबंध है या पुलिस यह मानती है कि अनुसूचित जाति के लोग अपराधी ही होते हैं? ”

 

(टीम मध्यमार्ग)