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ज़्यादा नंबर लाने पर एससी लड़की को जाट जाति की लड़कियों ने पीटा

मुज़फ़्फ़रनगर। जातीय नफरत के कारण एक बड़े वर्ग सदियों के साथ अत्याचार किए जा रहे हैं। देश में कानून होने के बाद भी जातीय नफरत बरकरार है, जिससे यह बात साफ है कि भारत में लोग सबसे उपर अपनी जाति को रखते हैं। जातीय नफरत का एक और मामला सामने आया है।

क्या था पूरा मामला?

17 साल की पीड़िता पचेनड्डा गाँव की ‘जनता इंटर कॉलेज’ की बारहवीं कक्षा की छात्रा हैं। शनिवार 14 अक्टूबर को उसके साथ नफरत से भरी जाति की लड़कियों ने बेरहमी से पीटा। उसको स्कूल के सैकड़ों बच्चों के सामने डंडो से पीटा।

इस भयंकर मारपीट से प्रगति बेहोश हो गई थी। इस मारपीट के बाद प्रगति के माता-पिता की शिकायत पर स्कूल प्रसाशन ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई और मारपीट करने वालों के परिवार से बुलाकर बात तक नहीं की।

इससे गाँव के अनुसूचित जाति के लोगों में आक्रोश फैल गया और वो एकजुट होकर पुलिस में शिकायत करने पहुंच गए। नई मंडी थाने पर इन लड़कियों के विरुद्ध एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत मुक़दमा दर्ज किया गया है।

इस घटना के बाद से गाँव में भारी तनाव है और कई बार एससी और जाट आमने-सामने आ चुके हैं। कई बार पुलिस का घेराव भी कर चुके हैं। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

पीड़िता की बहन ने बताया-

प्रगति की बड़ी बहन निशा मेरठ से बीसीए कर रही हैं। उन्होंने बताया कि कल जब हम लोग पुलिस के पास गए तो सीओ मंडी ने कहा, क्या हुआ आपकी लड़की मरी तो नहीं है ना!

निशा का कहना है कि, उन्हें लग रहा था कि पुलिस की कार्रवाई के लिए किसी का मरना ज़रूरी है। लेकिन हमारी बहन तो ज़िन्दा है और न्याय की लड़ाई लड़ रही है। मगर इन ‘ऊंची जात’ वालों का ज़मीर ज़रूर मर गया है।

प्रगति ने बताया कि स्कूल में एससी लड़कियों को हर तरह से परेशान किया जाता है। पास के गाँव की एक एससी लड़की के पास सीट पर कोई नहीं बैठता और ज्यादातर एससी लड़कियाँ अपना पानी घर से लेकर जाती हैं।

प्रगति ने बताया-

“वो चार लड़कियाँ लगातार मुझ पर कमेंट करती थीं। उनकी बिरादरी की दूसरी लड़कियाँ भी इस पर मज़ाक बनाती थी। मुझे चमेठी (जाति सूचक शब्द) और अछूत कहकर मेरा उत्पीड़न किया जाता था। यह दसवीं से हुआ, जब मेरे 75% मार्क्स आए। ग्याहरवीं में भी मेरे नम्बर उनसे ज्यादा थे। अब त्रैमासिक टेस्ट में भी मेरे नम्बर उनसे ज्यादा आ गए। इसे लेकर वो मुझ पर आग बबूला थीं। मुझे तीन दिन लगातार ‘चमारिन गिठल’ कहती रहीं। मेरी सीट पर क्लास में लगातार छेड़छाड़ करती रही। मैंने अपनी टीचर से शिकायत की। मगर इससे वो और ज्यादा परेशान करने लगीं। मुझे शनिवार को पानी पीने से रोक दिया गया। दोपहर बाद छुट्टी होने पर इन लड़कियों ने अपने बैग से डंडे निकाले और मुझे पीटने लगीं। मेरा सर फोड़ दिया। मुझे पीटते हुए घसीटा गया। यही नहीं, प्रिंसिपल ने मेरा दर्द नज़रअंदाज किया और लड़कियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की। तब मैं पुलिस में गई। मैं चुप नहीं बैठूंगी। यह मेरी जाति का अपमान हैं।”

पचेनड्डा गाँव दिल्ली से देहरादून मार्ग पर मुज़फ्फ़रनगर बाईपास पर है। यह एक जाट बहुल गाँव है। 5600 की आबादी वाले इस गांव में 1800 जाट और 1200 एससी परिवार हैं।

(टीम मध्यमार्ग)
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