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हरियाणा सेंट्रल यूनिवर्सिटी के सिलेबस में शामिल हुए सावरकर और गोलवलकर

जल्द ही हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में आरएसएस के विचारक रहे एम.एस. गोलवलकर, दीनदयाल उपाध्याय और वी.डी. सावरकर के विचार शामिल किए जाएंगे। सरकार ने छात्रों में (हिंदू) राष्ट्रवाद की भावना जगाने के लिए ही इनको शामिल कर रही है।

विश्वविद्यालय की ओर से गुरुवार 3 अगस्त को यह जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय की तरफ से कहा गया कि स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, दयानंद सरस्वती, राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण और आचार्य नरेंद्र देव के विचारों को भी राजनीति शास्त्र के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया गया है।

विश्वविद्यालय की ओर से एक बयान में कहा गया, ‘यह निर्णय छात्रों के बीच उच्चस्तर की नैतिकता के सर्वोत्तम गुणों, नैतिक मानकों और (हिंदू) राष्ट्रवाद की भावना जगाने के लिए लिया गया है।’ विश्वविद्यालय ने इस बात पर जोर डालते हुए कहा कि इन दूरदर्शियों ने राष्ट्रनिर्माण और (हिंदू) राष्ट्रवाद के विचार को सामने लाने में अद्वितीय और महत्वपूर्ण योगदान दिया।

विश्वविद्यालय के निर्णय का स्वागत करते हुए, उपकुलपति आर.सी. कुहाद ने कहा, ‘पाठ्यक्रम में यह बदलाव एक नई शुरुआत है। जो राजनीति शास्त्र के छात्रों को इन प्रमुख राजनीतिक विचारकों के परिप्रेक्ष्य और नजरिए की मदद से विषय को समझने में मदद मिलेगी। इन राष्ट्रवादियों की शिक्षाएं राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर के द्वितीय वर्ष के छात्रों को उनके तीसरे और अंतिम सेमेस्टर में दी जाएंगी।’

आरएसएस बीजेपी का वैचारिक पैतृक संगठन है। हरियाणा में बीजेपी सत्ता में है। आरएसएस की विचारधारा पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि उनकी नजर में हिंदू धर्म की विचारधारा ही राष्ट्रवाद है।

महाश्वेता देवी की लघुकथा पर आधारित द्रौपदी का मंचन नाटक को लेकर हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय का नाम एक बार विवादों में आया था। नाटक आदिवासी महिलाओं पर हो रहे अत्याचार पर था, जिसमें जिन छात्रों ने भाग लिया था उनपर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। और देशद्रोही नाटक के कलाकारों को देशद्रोही कहा गया।

छात्र जो अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को देशद्रोही मानती है और शायद इसीलिए उनमें (हिंदू) राष्ट्रवाद की भावना भरना चाहती है।

 

(टीम मध्यमार्ग)