ख़बरें

‘पवित्र गो रक्षकों’ को सरकार से डरने की जरूरत नहीं’- मोहन भागवत

आए दिन सरेआम लोगों को पीट-पीटकर मारे जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कभी गाय के नाम पर तो कभी देश के नाम पर लोगों को मारा जा रहा है। जब से केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी है गाय के नाम पर लोगों को मारने की घटनाएँ आम होती जा रही हैं।

मोहन भागवत ने गौवादी गुंडो का किया बचाव

गाय के नाम पर लोगों की पीट-पीटकर की जाने वाली हत्याओं पर आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार 30 सितंबर को साफ-साफ गौवादी गुंडों का बचाव किया है।

गौरक्षकों को चिंतित होने की जरूरत नहीं

मोहन भागवत ने कहा कि गौरक्षकों को हिंसक घटनाओं के साथ जोड़ना ठीक नहीं है। गौरक्षकों और गौपालकों को चिन्तित या विचलित होने की आवश्यकता नहीं है। चिंतित आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को होना चाहिए, गौरक्षकों को नहीं।

उन्होंने ऐलान किया कि गौरक्षा व गौसंवर्धन का वैध व पवित्र परोपकारी कार्य चलेगा और बढ़ेगा और यही इन परिस्थितियों का उत्तर भी होगा।

विजयदशमी के पर्व पर आरएसएस मुख्यालय में एक घंटे के अपने संबोधन में भागवत ने अवैध शरणार्थियों, गौ रक्षकों, जम्मू कश्मीर की स्थिति और आर्थिक हालात जैसे कई विषयों का जिक्र किया।

मोहन भागवत ने कहा कि गौरक्षा से जुड़े हिंसा व अत्याचार के बहुर्चिचत प्रकरणों में जाँच के बाद इन गतिविधियों से गौरक्षक कार्यकर्ताओं का कोई संबंध सामने नहीं आया है।

गौरक्षकों की हत्या पर नहीं हुई कार्रवाई

इधर के दिनों में उलटे अहिंसक रीति से गोरक्षा का प्रयत्न करनेवाले कई कार्यकर्ताओं की हत्याएँ हुई हैं। उसकी न कोई चर्चा है, न कोई कार्रवाई।

उन्होंने कहा कि वस्तुस्थिति न जानते हुए अथवा उसकी उपेक्षा करते हुए गौरक्षा व गौरक्षकों को हिंसक घटनाओं के साथ जोड़ना व सांप्रदायिक प्रश्न के नाते गौरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगाना ठीक नहीं है।

कम खर्चे में विषमुक्त खेती करने का सहज सुलभ उपाय गौ आधारित खेती ही है। इसलिए गौरक्षा तथा गौ संवर्धन की गतिविधि संघ के स्वयंसेवक, भारतवर्ष के सभी संप्रदायों के संत, अनेक अन्य संगठन, संस्थाएँ तथा व्यक्ति चलाते हैं।

गाय अपनी सांस्कृतिक परंपरा में श्रद्धा का एक मान बिंदु है। गौरक्षा का अंतर्भाव अपने संविधान के मार्गदर्शक तत्वों में भी है। कई राज्यों में उसके लिए कानून विभिन्न राजनीतिक दलों के शासन काल में बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और विशेषकर बांग्लादेश के सीमा पार से गौधन की तस्करी एक चिंताजनक समस्या बनकर उभरी है। गौधन के उपरोक्त लाभों में ये गतिविधियाँ और अधिक उपयुक्त हो जाती हैं। ये सभी गतिविधियाँ, उनके सभी कार्यकर्ता कानून, संविधान की मर्यादा में रहकर करते हैं।

उन्होंने कहा कि अनेक मुस्लिम भी गौरक्षा, गौपालन व गौशालाओं का उत्तम संचालन कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि गौरक्षा के विरोध में होने वाला कुत्सित प्रचार बिना कारण ही विभिन्न संप्रदायों के लोगों के मन पर तथा आपस में तनाव उत्पन्न करता है। यह मैंने कुछ मुस्लिम मतानुयायी बंधुओं से ही सुना है।

मोहन भागवत ने कहा-

“ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी से, सात्विक भाव से, संविधान कानून की मर्यादा का पालन कर चलने वाले गौरक्षकों को, गौपालकों को चिन्तित या विचलित होने की आवश्यकता नहीं। यह हिंसा में लिप्त आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के लिए चिन्ता का विषय होना चाहिए।”

 

 

(टीम मध्यमार्ग)