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गौ रक्षकों द्वारा मारे गए अलीमुद्दीन अंसारी केस के प्रमुख गवाह की पत्नी की दिन दहाड़े हत्या

नई दिल्ली: 19 जुलाई को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि “गौभक्ति के नाम पर लोगों को मारना स्वीकार्य नहीं है” .अलीमुद्दीन अंसारी झारखंड के रामगढ़ में एक बाजार में दिन दहाड़े मारे गए थे। वाहन में गोमांस ले जाने के संदेह पर, अंसारी को मार डाला गया था। इस वारदात का पूरा वीडियो हमलावरों द्वारा खुद और उनके समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था।

उन्हें अदालत के कमरे में ही मौत की धमकियाँ मिल रही  थीं

अदालत मामले की सुनवाई कर रही थी जिसमे ढाई महीने बाद जलील अन्सारी की पत्नी की हत्या हो गई जो की इस घटना के मुख्य गवाह हैं। यह घटना कोर्ट से महज एक किलोमीटर की दूरी पर हुई, जिसमे अलीमुद्दीन अंसारी का बेटा बुरी तरह से घायल हो गया। यह कहा जा रहा है कि उन्हें अदालत के कमरे में ही मौत की धमकियाँ मिल रही  थीं। जहां उनसे कहा गया था कि अगर वे केस वापस नहीं लेंगे तो उन्हें जान से मर दिया जायेगा। बताया जा रहा है कि ये दोनों एक मोटरसाइकिल पर गवाह के पास पहचान पात्र लेने जा रहे थे। इस घटना के चश्मदीदों के अनुसार, उनका पीछा किया गया और पीछे से हमला किया गया।  इसमें महिला की मौत मौके पर ही हो गयी और अलीमुद्दीन अन्सारी का बेटा घायल हो गया जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां से रामगढ़ जिले के अन्य स्थानों पर प्रतिबंधित मांस गोपनीय तरीके से भेजा जाता है। बताया जाता है कि उक्त स्थान से बाहर मांस भेजने के लिए तीन- चार युवकों का एक गिरोह है। इनका संपर्क शहर के तथाकथित गो रक्षकों से भी है। अगर बाहर मांस ले जाने वाले लोग इन युवकों से प्रतिबंधित मांस का व्यापार नहीं करते हैं, तो ये युवक ही रामगढ़ में तथाकथित गो रक्षकों को सूचना देकर प्रतिबंधित मांस के वाहन को पकड़वा देते हैं। इस घट्न और फिर इसके बाद इस हमले में उन्ही का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है।

 

स्थानीय भाजपा नेता नित्यानंद महातो और संतोष सिंह को हत्या के लिए शुरू में ही गिरफ्तार किया गया था

स्थानीय नागरिक से कहा कि परिवार को इस बीच हफ्तों से लगातार धमकियाँ मिल रही थीं। खासकर जब से जुलाई में कुछ संदिग्धों को इस हत्याकांड के लिए गिरफ्तार किया गया है। स्थानीय भाजपा नेता नित्यानंद महातो और संतोष सिंह को हत्या के लिए शुरू में ही गिरफ्तार किया गया था। जबकि 12 अन्य संदिग्धों में से एक आरोपी छोटू राणा ने रामगढ़ अदालत में आत्मसमर्पण किया था।
अलीमुद्दीन अंसारी के रिश्तेदारों ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि व्यस्त बाजारों में दुकानदारों और चाय के स्टाल मालिकों के सामने उन्हें मार दिया गया है। लेकिन किसी ने इसका विरोध नहीं किया और न इस हत्या को रोकने की कोशिश की।

इस हत्या के मामले में पुलिस की भूमिका भी संदेह की घेरे में है

आपको बता दें कि इस हत्या के मामले में पुलिस की भूमिका भी संदेह की घेरे में है। बताया जा रहा है कि पिटाई के दौरान पुलिस की लाठी का प्रयोग किया गया था। हालांकि डीजीपी ने इस बात को गलत बताया और सबूत देने को कहा। हत्या के दूसरे दिन एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक युवक को पुलिस के डंडे का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया था। कहा तो यह भी जा रहा है कि अलीमुद्दीन की पिटाई के वक्त कुछ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे।  उन्होंने अलीमुद्दीन को नहीं बचाया और उनसे डंडा लेकर युवकों ने अलीमुद्दीन की पिटाई की। अगर पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे तो पिटाई कर रहे लोगों के पास पुलिस का बेंत कैसे पहुंचा। घटना भी बेहद भीड़-भाड़ इलाके में हुई थी.
मामले को हल करने के लिए एक विशेष अदालत की स्थापना हुई थी। तभी पहले ही एक गवाह मर दिया गया था। परिवार तभी से दबाव महसूस कर रहा है क्योंकि स्थानीय बजरंग दल और बीजेपी सदस्यों ने उन्हें चेतावनी दी थी।

 हमें समझ ही नहीं आ रहा कि करें तो क्या करें। कोई भी हमारी रक्षा नहीं कर रहा है

रिश्तेदार और स्थानीय कार्यकर्ता यह कहते हैं कि यह “दुर्घटना” नहीं है बल्कि गवाहों को धमकी देने और धमकाने के लिए एक “जानबूझकर की गयी हत्या” है। दस्तावेजों को इकट्ठा करने के लिए दो बजे के ठीक पहले, उन्हें स्थानीय कार्यकर्ताओं के अनुसार गवाही देने के लिए कहा गया जो अदालत परिसर में उनके साथ थे। पिछले कुछ हफ्तों से जिस तरह खतरे और दुर्व्यवहार का माहौल बन रहा था उससे अंसारी परिवार को दबाव महसूस हो रहा था। जलाल अंसारी,अपनी पत्नी की वापसी के लिए इंतजार कर रहे थे जब उन्हें बताया गया कि उसकी एक दुर्घटना में मौत हो गयी है तो वो दुःख में अदालत में ही चिल्ला पड़े। जलील अंसारी, जो कि घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं, ने कहा है कि उनकी पत्नी जब पहचान पत्र लाने के लिए नीली उससे तुरंत पहले ही उन्हें और उनकी पत्नी को गंभीर दुष्परिणामों से धमकी दी गयी थी।
अलीमुद्दीन अंसारी की पत्नी मरियम खतून ने कहा, “हम घर से बाहर जाने से डरते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे खतरे से भरे माहौल में उसका बेटा और जलील अन्सारी की पत्नी घर से अपने आधार कार्ड लेने के लिए गए थे। उनका एक मोटर साइकिल पर पुरुषों द्वारा पीछा किया, जिन्होंने उन्हें लात मार कर मोटर सायकिल से गिरा दिया।और उनपर हमला कर दिया। जिसमे मेरी ननद मारी गयी और मेरा बेटा किसी तरह बच गया  लेकिन उसे बहुत चोटें आयी हैं। उन्हों आगे कहा कि जीवन इतना कठिन और भयभीत हो गया है, कि हमें समझ ही नहीं आ रहा कि करें तो क्या करें। कोई भी हमारी रक्षा नहीं कर रहा है।
(सोर्स-द सिटीज़न, PTI )
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