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“मैं यूनिवर्सिटी प्रोफेसर हूं लेकिन उनलोगों ने मेरी एक नहीं सुनी और मुझे भी पीटते रहे”

वाराणसी। पिछले शनिवार बीएचचू में छात्राओं के साथ हुई हिंसा में अब परत दर परत नए खुलासे सामने आ रहे हैं। बीएचयू में जहां छेड़छाड का विरोध करती छात्राओं पर पुलिस ने बर्बरता दिखाते हुए लाठियां बरसाई वहीं पुलिस ने बीएचयू के स्‍टाफ की महिलाओं को भी नहीं बख्‍शा।

लेडी प्रोफेसर से पुलिस ने की बदतमीजी, गालियां और अभद्रता

ऐसी ही एक महिला प्रोफसर का दर्द सामने आया जब इंडियन एक्‍सप्रेस से बात करते हुए उन्‍होंने अपनी आप बीती सुनाई। इंडियन एक्सप्रेस से अपना दर्द साझा करने वाली महिला महाविद्यालय की समाजशास्त्र की असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉ. प्रतिमा गोंड ने कहा कि जब वो पुलिस के लाठीचार्ज से एक छात्रा को बचाने की कोशिश कर रही थीं, तब उन्हें पुलिसकर्मियों ने बेइज्जत किया और उन पर लाठियां भी बरसाईं।

लेडी प्रोफेसर कहती रही कि वो प्रोफेसर है और पुलिस भांजती रही लाठियां

डॉ. गोंड ने बताया, “जब पुलिस लाठीचार्ज कर रही थी, तभी भीड़ में एक छात्रा गिर गई। यह देखकर मैं उसे बचाने, उस छात्रा के पास पहुंच गई लेकिन मैं भी उनके लाठीचार्ज की शिकार हो गई। इस दौरान में उससे गुजारिश करती रही कि मुझे मत मारो, मैं यूनिवर्सिटी प्रोफेसर हूं लेकिन उनलोगों ने मेरी एक नहीं सुनी और मुझे भी पीटते रहे।” प्रोफेसर गोंड ने कहा कि उस हादसे से मैं आज तक नहीं उबर सकी हूं।

 

(टीम मध्यमार्ग)