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अडानी के ख़िलाफ़ ‘द गार्डियन’ की वह दस्तावेज़ी रिपोर्ट जिसे भारतीय मीडिया नहीं दिखा सका

अडानी के ऑस्ट्रेलिया में कोल माइन प्रोजेक्ट को लेकर ऑस्ट्रेलियाई मीडिया द्वारा छानबीन करने के लिए पिछले हफ्ते एक टीम तगुजरा भेजी गयी थी। प्रशासन द्वारा उन्हें डराया धमकाया  भागने पर मजबूर किया गया।  उन्होंने उसपर न सिर्फ रिपोर्ट बनायी बल्कि फोर कॉर्नर्स नाम से एक पूरा एपिसोड बनाया। भारतीय मीडिया हमेशा की तरह सत्ता के आगे घुटने टेके हुए है। सत्ता यानी अडानी, वर्तमान सरकार में  पर्यायवाची शब्द हो चुके हैं। भारत में अडानी ग्रुप पर बिजली और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आयात किए गए सामानों का कुल मूल्य बढ़ाकर 3974.12 करोड़ रुपये घोषित करने और उस पर शून्य या कम 5% से कम टैक्स देने के जो आरोप हैं उसपर जांच के आदेश को रोक दिया गया है।राजस्व ख़ुफ़िया निदेशालय ने इस जाँच पर रोक लगा दी है।

बता दें कि साल 2014 में ही इंडियन एक्सप्रेस ने खबर छापी थी कि आयातित वस्तुओं का मूल्य अधिक दिखाने और कर चोरी के मामले में डीआरआई ने अडानी ग्रुप को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

अभी तकरीबन एक महीना पहले ब्रिटिश अखबार द गॉर्डियन ने भी छापा कि भारतीय कस्टम विभाग के डॉयरेक्टरेट ऑफ रेवन्यू इंटलीजेंस (डीआरआई) ने मशहूर कारोबारी घराने अडानी समूह पर फर्जी बिल बनाकर करीब 1500 करोड़ रुपये टैक्स हैवेन (टैक्स चोरों के स्वर्ग) देश में भेजने का आरोप लगाया है। गॉर्डियन के पास मौजूद डीआरआई के दस्तावेज के अनुसार अडानी समूह ने महाराष्ट्र की एक बिजली परियोजना के लिए शून्य या बहुत कम ड्यूटी वाले सामानों का निर्यात किया और उनका दाम वास्तविक मूल्य से कई गुना बढ़ाकर दिखाया ताकि बैंकों से कर्ज में लिया गया पैसा विदेश भेजा जा सके।
समूचा भारतीय मीडिया इस खबर को दबा गया। गार्डियन की इस दस्तावेजी रिपोर्ट हो हम आपके लिए हिंदी में ला रहे हैं।

आष्ट्रेलिया मे खनन अधिकार के लिये प्रयासरत खनन कम्पनी अदानी पर वित्तीय फ्रॉड के आरोप – द गार्डियन 

 

विशेष: भारतीय कस्टम विभाग के इस सम्बंध मे आरोप कि “कम्पनी ने अपने प्रोजेक्ट्स से भारी मात्रा मे धन टैक्स हैवन देशो मे चोरी से जमा किये हैं” लीगल दस्तावेजो मे दर्ज है परंतु कम्पनी आरोप से इनकार कर रही है

(रिपोर्ट की मुख्य फोटो : लोगो ने आष्ट्रेलियन प्राइम मिनिस्टर मैल्कम टर्नबुल और अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी का मास्क लगाकर पार्लियामेंट भवन कैनबरा के बाहर प्रदर्शन किया. फोटो साभार लुकास कोच/एएपी  )

एक ग्लोबल माइनिंग जायंट जो पब्लिक मनी के सहारे आष्ट्रेलिया मे विश्व की सबसे बडी कोल माइंस विकसित करना चाहती है पर आरोप हैं कि वो फ्राड करके लिये कर्ज से अरबो रूपये टैक्स चोरी वाले देशो मे भेज रही है.

भारतीय कांग्लोमेरेट अदानी ग्रुप पर लगे आरोप कि “इसने अपने भारत के इलेक्ट्रीसिटी प्रोजेक्ट को दिये बिल मे रकम बहुत बढाकर दर्शाकर चोरी की गई भारी रकम को अपने विदेशी बैंक खातो मे जमा कर रही है” पर फैसला आने की उम्मीद थी लेकिन राजस्व ख़ुफ़िया निदेशालय ने इस जांच पर ही रोक लगा दी
यह जांच आगे शायद कभी हो या नहीं भी हो लेकिन इस पर गार्डियन द्वारा जो महत्वपूर्ण खोजी दस्तावेजी रिपोर्ट तैयार हुई वह आपके लिए नीचे दी जा रही है।

 

अदानी की  Carmichael coalmine योजना क्यो आष्ट्रेलिया और विश्व के लिये महत्वपूर्ण है

1500 करोड रूपये (235 मिलियन डॉलर) के फ्राड के इस आरोप का विवरण द गार्जियन को प्राप्त भारतीय कस्टम इंटेलीजेंस के उस नोटिस मे है जिसका सारांश पहली बार यहाँ प्रकाशित किया जा रहा है। रेवेन्यू इंटेलीजेंस निदेशक (DRI) की फाइल जो 2014 मे बनी मे उस जटिल रास्ते का विवरण है कि कैसे पैसा भारत से दक्षिण कोरिया और दुबई होते हुये अंततः मारिसस मे एक ऑफशोर कम्पनी को भेजा गया। यह पैसा विनोद शांतिलाल अदानी (जो अरबपत अदानी ग्रुप के चेयरमैन के चीफ एक्जीक्यूटिव गौतम अदानी के बडे भाई हैं) द्वारा भेजे जाने का आरोप है। विनोद अदानी उन चार कम्पनीज मे डायरेक्टर हैं जिन्होने क्वींस्लैंड के विशाल कार्मिशेल माइन प्रोजेक्ट के पास एक रेलवे लाइन बनाने और उससे सटे कोल-पोर्ट के विस्तार का प्रस्ताव दिया है। ये प्रस्तावित माइन, जो आष्ट्रेलिया की सबसे बडी माइन होगी, वर्षो से इसके पर्यावरण पर सम्भावित प्रभाव को लेकर तमाम विवादो, कानूनी लडाइयो और विरोध का केंद्र रही है।

 

Abbot Point, surrounded by wetlands and coral reefs, is set to become the world’s largest coal port should the proposed Adani expansion go ahead, Photograph: Tom Jefferson / Greenpeace

 

रिपोर्ट में बताया गया है कि एबोट प्वाइंट, जिसके चारो तरफ दलदल और कोरल रीफ है विश्व का सबसे बडा कोल पोर्ट बन जायेगी अगर अदानी का प्रस्तावित प्रोजेक्ट पूरा होता है। कोल पोर्ट को विस्तार कर माइन तक ले जाने मे ग्रेट बैरियर मरीन पार्क के पास तल मे करीब 11 लाख घन मीटर कचरा पैदा होगा. माइन से निकले कोल से भी करीब मलेशिया या आस्ट्रिया के बराबर वार्षिक उत्सर्जन होगा।

अदानी ग्रुप की एक बडी बाधा “कोल माइन के विकास और कोल माइन से क्वींस्लैंड तट के अबोट प्वाइंट स्थित पोर्ट तक कोल ले जाने के लिये रेलवे लाइन निर्माण” के लिये पैसे जुटाने की है। रेल लाइन निर्माण के लिये, अदानी को उम्मीद है कि वो नार्दर्न आस्ट्रेलिया फैसिलिटी (NAIF), जो कि आस्ट्रेलियन सरकार समर्थित एक इंवेस्टमेंट फंड है, को पब्लिक मनी से अदानी ग्रुप या इसकी किसी यूनिट को 700 मिलियन यूएस डॉलर (900 मिलियन आष्ट्रेलियन डालर) कर्ज लिये राजी कर लेंगे।

 

Adani Group chairman Gautam Adani meets with Queensland premier Annastacia Palaszczuk in 2016. Photograph: Cameron Laird/AAP

 

जांच के सम्बंध मे

इस जांच की खबर 3 साल पहले आई थी परंतु कस्टम इंटेलीजेंस के समस्त दस्तावेज जो कि आरोपित फ्राड के वर्किंग की फोरेंसिक जानकारी का ब्योरा देते हैं को पब्लिकली नही बताया गया था।

97 पेज की फाइल मे अदानी ग्रुप पर आरोप लगाया गया है कि इसने दुबई स्थित अपनी कम्पनी के द्वारा अपने पश्चिम भारत, महाराष्ट्र प्रदेश के इलेक्ट्रीसिटी प्रोजेक्ट के लिये  अरबो रूपये मूल्य के इक्विपमेंट का आर्डर दिया।

आरोप के अनुसार दुबई कम्पनी ने फिर उन इक्विपमेंट्स को वापस भारत मे अदानी ग्रुप नियंत्रित बिजनेस को काफी ऊंची कीमतो पर बेंच दिया, जो कुछ मामलो मे 8 गुना तक दाम पर बेंचा।

फाइल मे दर्ज आरोपो के अनुसार, इन सौदो के कारण अदानी ग्रुप का मटेरियल पर खर्च 400% तक बढ गया। भारतीय अधिकारियो का आरोप है कि ये धन एक ऐसी कम्पनी को दिया गया जो कई शेल कम्पनीज के चेन से होते हुये एक मारिशस स्थित ट्रस्ट तक पहुंचा जिसके मालिक विनोद अदानी हैं।

अगर ये सत्य है, तो इस फ्राड का अर्थ है कि अदानी ग्रुप के भारतीय खातो से भारी राशि ऐसे विदेशी खातो मे जमा की गई है जहाँ ना तो इस पर टैक्स लगेगा ना ही इसकी जानकारी होगी।

चूंकि बिजली का मूल्य कुछ हद तक इलेक्ट्रीसिटी ट्रांसमिशन नेटवर्क की निर्माण लागत से तय होगी, तो यदि लगे आरोप सही हैं तो, कैपिटल गुडस की लागत बढाकर बताने से भारतीय उपभोक्ताओ को ज्यादा मन्हगी दर पर बिजली खरीदनी पडेगी.

यदि आरोप सही हैं तो, जो पैसा अदानी ने चोरी से विदेशी खातो मे भेजा है उसका एक बडा हिस्सा भारतीय करदाताओ का है जो पब्लिक सेक्टर बैंक्स एसबीआई और प्राइवेट बैंक आईसीआईसीआई से बतौर लोन मिला है। ऐसे कोई सुझाव रिपोर्ट मे नही हैं कि इन बैंको को इस अवैध गतिविधि की जानकारी है या वो इसमे शामिल हैं।

 

 

अदानी ग्रुप ने अपने, अपने सब्सिडियरीज और विनोद अदानी की तरफ से गार्जियन को दिये बयान मे कहा है कि “ओवरवैल्यूयेशन के आरोप बिलकुल असत्य हैं।”

उन्होने कहा कि “ये हमारे ग्रुप की स्टैंडर्ड प्रक्रिया है कि हम अपने अधिकांश कैपिटल खर्च के लिये अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगी निविदा मंगाते हैं ताकि पूरी प्रक्रिया मे पारदर्शिता और प्रतियोगी कीमत सुनिश्चित रहे। हमारे सबी सौदे कानूनी निर्देशो और प्रावधानो के अनुसार किये गये हैं।”

“ये तथ्य कि हमारे प्रोजेक्ट्स की लागत सभी केंद्रीय, राज्य और प्राइवेट कम्पनियो मे सबसे कम है प्रमाण है कि हमारे ग्रुप द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाये यथोचित हैं।”

स्टेटमेंट मे ये भी कहा गया है कि “ये भी ध्यान दिया जाय कि श्री विनोद अदानी जो कि गौतम अदानी के बडे भाई हैं करीब 30 साल से एक एनआरआई हैं और भारत से बाहर उनका खुद का बिजनेस है”  “अदानी ग्रुप को जानकारी है कि रेवेन्यू इंटेलीजेंस निदेशक द्वारा जांच चल रही है अंद ग्रुप ने जांच मे पूरा सहयोग दिया है और आगे भी जांच एजेंसियो से सहयोग जारी रखेगी।”

 

आष्ट्रेलियन लोन के सम्बंध मे

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अदानी ग्रुप या इसकी किसी इकाई को आष्ट्रेलियन गवर्मेंट इंवेस्टमेंट फंड NAIF की तरफ से US$700m (AU$900m) का सशर्त कर्ज मंजूर किया गया है। परंतु इंवेस्टमेंट फंड की प्रक्रिया गोपनीय होने के नाते ये स्पष्ट नही कि लोन मंजूर करते समय DRI नोटिस या चल रही जांच की जानकारी दी गई है या नही, या कि, क्या आवेदक को NAIF की एंटी-मनी लांडरिंग प्रावधानो के तहत ऐसी जानकारी देना जरूरी है।

गार्डियन के पूछे जाने पर भी अदानी ग्रुप ने ये बताने से इनकार कर दिया कि क्या उन्होने NAIF को इस आरोप की जानकारी दी है।

NAIF इंवेस्टमेंट के नियमो मे ये प्रावधान है कि NAIF ऐसे कार्य नही करेगा जिनसे कामनवेल्थ की सरकार या इसके किसी प्रदेश या टेरिटरी सरकार के प्रतिष्ठा को नुकसान हो।

 

 

विनोद अदानी इस समय 4 सिंगापुर बेस्ड कम्पनीज के इकलौते निदेशक हैं जो अपनी आष्ट्रेलियन सब्सिडियरीज के द्वारा सरकारी लोन के मदद से रेलवे लाइन का निर्माण करेंगे। कम्पनी अबोट प्वाइंट पोर्ट के विस्तार से जुडे प्रोजेक्ट को भी चलाती है।

इन सभी 4 कम्पनियो की मालिक अंततः एक केमैन आईलैंड स्थित अदानी नियंत्रित कम्पनी “अतुल्य रिसोर्स लिमिटेड” हैं

 

भारत में जांच की स्थिति

द गार्डियन को जानकारी मिली कि दाम बढाकर भुगतान करने का आरोप्प की जांच DRI से हटाकर Enforcement Directorate (ED) जो कि फाइनेंसियल फ्राड की जांच करने की भारतीय एजेंसी है को सौंप दी गई है।

अदानी ग्रुप का कहना है कि केस अब एक लीगल अथारिटी जो न्यायिक निर्णय अधिकारी हैं, के पास है, और संकेत दिया कि भारतीय अधिकारी दबाव दे रहे हैं कि या तो मनी लांडरिंग से सम्बंधित सम्पत्ति सीज की जाय या फिर आरोपित विदेश भेजी गई रकम का 3 गुना दंड आरोपित किया जाय।

ये पूंछे जाने पर कि कितना दंड की मांग की गई है कम्पनी ने जबाब देने से इनकार कर दिया, यद्यपि उनके प्रवक्ता ने कहा कि इस सम्बंध मे निर्णय शीघ्र सम्भावित है। “हम कार्पोरेट गवर्नेंस का पालन करते हैं और सभी मौजूदा कानूनो का पालन कर रहे हैं” उन्होने कहा.

 

adani with PM Modi

 

“हमारे सभी ट्रांजैक्शंस कानून के अनुसार ही होते हैं। हमने आरोपो पर विस्तृत जवाब दे दिया है। इस विषय पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है और हमे शीघ्र फैसले की उम्मीद है”

द गार्डियन DRI की फाइल के कुछ अंश इसलिये प्रकाशित कर रहे हैं कि NAIF और पब्लिक दोनो को वो अधिक से अधिक प्रासंगिक जानकारी मिल सके कि तय कर सके कि क्या अदानी या उनकी लिंक कम्पनीज को पब्लिक मनी देना उचित होगा।

एक अलग केस मे भी 6 अदानी ग्रुप कम्पनियाँ उन 40 कम्पनियो मे थी जिनके खिलाफ ऐसे ही मूल्य वृद्धि गतिविधियो मे संलग्न होने के आरोप पर जांच चल रही थी। इन कम्पनियो पर इंडोनेशिया से आयातित कोयले का मूल्य बढाकर हुये प्राफिट को कर चोरी के देशो मे छुपाने का आरोप था।

 

पैसे का कथित रास्ता 

भारत मे गम्भीर बिजली की कमी है. करीब 24 करोड लोग, जो विश्व का पांचवा सबसे बडा देह्स बना सकते हैं, के पास बिजली नही है।

1990 के शुरुआती दौर मे, पावर कम्पनियो को इलेक्ट्रिसिटी इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिये प्रोत्साहित करने के लिये, भारत सरकार ने टेक्निकल इक्विपमेंट जैसे रियेक्टर्स और ट्रान्सफार्मर्स पर से आयात ड्यूटी हटा ली थी। इससे इन कम्पनियो का प्राफिट मार्जिन रातो रात बढ गया।

अदानी ने इसमे बिजनेस अवसर देखा। 2010 मे अदानी की पूर्ण स्वामित्व की सब्सिडीयरी Maharashtra Eastern Grid Power Transmission Company Limited (MEGPTCL), को नार्थ-ईस्ट मे इलेक्ट्रीसिटी नेटवर्क विकसित करने का लाइसेंस मिला।

कम्पनी ने एक अन्य सब्सिडियरी PMC Projects का इस्तेमाल किया इस नेटवर्क को बनाने के लिये जरूरी इक्विपमेंट मंगाने के लिये। PMC ने फिर इस वर्क को दुबई की एक कम्पनी को इसका ठेका दे दिया।

जांच अधिकारियो के अनुसार, बैंक रिकार्ड के अनुसार कम्पनी Electrogen Infra FZE (EIF), ने काफी ज्यादा प्राफिट चार्ज करके PMC को बेंचा जो अधिकारियो की नजर मे संदिग्ध है।

 

 

Guardian graphic

 

रेपोर्ट के अनुसार 57 मे से एक इंवाइस मे, आरोप के अनुसार, EIF ने इक्विपमेंट के लिये  Hyundai Heavy Industries in South Korea को आर्डर दिया। बैंक रिकार्ड के अनुसार कम्पनी ने हुंडई को 65 मिलियन यूएस डालर दिये। पर DRI के अनुसार इसने उसी इक्विपमेंट को पीएमसी को 260 मिलियन यूएस डालर मे बेचा जो कि करीब 4 गुना अधिक है।

 

अदानी ग्रुप पर DRI की फाइल के पेज 14-15 का अंश

“ये असामान्य अय्र काफी ज्यादा मूल्य वृद्धि लगता है जो सामान्य आर्थिक तर्को और समझदारी के विरुद्ध है”  जांच अधिकारी ने निष्कर्ष दिया।

 

Extract from page 14-15 of the Directorate of Revenue Intelligence file on Adani Group. Photograph: The Guardian

 

रिपोर्ट के आरोपो के अनुसार EIL कम्पनी ने हुंडई हैवी इंडस्ट्रीज को कुल 26 आर्डर दिये और उन्हे PMC को औसतन 400% से अधिक मार्क-अप पर बेंचा और  इस तरह 189 मिलियन यूएस डालर का प्राफिट बनाया।

ऐसे कोई सुझाव नही है कि हुंडई हैवी इंडस्ट्रीज या किसी अन्य सप्लायर को इस बात की जानकारी थी या वो इस अवैध काम मे शामिल थे।

 

अदानी ग्रुप पर DRI की फाइल के पेज 19-20, सेक्शन 4.1.16 का अंश

 

 Extract page 19-20 of the DRI file, section 4.1.16. Photograph: The Guardian

 

EIF पर आरोप है कि उसने 25 और शिपमेंट्स चाइना की 3 कम्पनियो से खरीदा। रिपोर्ट के अनुसार ये सभी अदानी ग्रुप को करीब 860% के औसत मार्क-अप पर बेचा गया।

जांच अधिकारियो के अनुसार कथित रूप से दाम बढाकर बेचे गये सामान का मूल्य करीब 1500 करोड रूपये है।

 

अदानी ग्रुप पर DRI की फाइल के पेज 78-79 सेक्शन 15.4 का अंश

 

Extract from page 78-79 of the DRI file, section 15.4. Photograph: The Guardian

 

DRI ने कहा “जिस पैमाने और मात्रा मे दाम बढाये गये उसे देखते हुये ये साफ है कि ये धन को भारत से बाहर फ्राड की नीयत से भेजा गया है”

 

कौन इन कम्पनियो को कंट्रोल करता है?

जांच अधिकारियो के अनुसार इस फ्राड के केंद्र मे जिस EIF को साउथ कोरिया और चाइना के मैंयुफैक्चरर से इक्विपमेंट खरीदने का ठेका दिया गया पर सीधा नियंत्रण अदानी ग्रुप और इसके सहयोगियो का है।

जांच अधिकारियो ने दावा किया है EIF मे कुछ कर्मचारी अदानी ग्रुप के पूर्व कर्मचारी हैं जिन्होने हाल ही मे अदानी ग्रुप छोडा था।

एक भारतीय बैंक को दिये कम्पनी के पत्र, जिसका जिक्र नोटिस मे है, मे ये कहा गया है कि EIF एक अन्य कम्पनी  Electrogen Infra Holding Pvt Ltd (EIH) के स्वामित्व मे है। इस शृन्खला के अंत मे एक मारिशस आधारित ट्रस्ट है जिसके मालिक विनोद अदानी हैं।

 

अदानी ग्रुप पर DRI की फाइल के पेज 21-22 सेक्शन 4.2.3 का अंश

 

Extract from page 21-22 of the DRI file, section 4.2.3. Photograph: The Guardian

 

जांच अधिकारियो के निष्कर्ष मे “EIF द्वारा बैंक को दिये गये उक्त सूचना से ये प्रतीत है कि विनोद अदानी का EIF की गतिविधियो पर असंख्य रिसोर्स फेमिली ट्रस्ट के माध्यम से सीधा नियंत्रण है।

विनोद अदानी जनवरी 2010-मई 11 के बीच EIH के निदेशक भी रहे हैं, यद्यपि नोटिस मे कहा गया है कि विनोद अदानी ने बताया कि उनका कम्पनी के रोजमर्रा के कामओ मे कोई दखल नही है।

जांच अधिकारियो ने ये भी दावा किया है कि उनकी जांच मे पाया गया है कि अदानी ग्रुप सब्सिडियरी PMC के एक कर्मचारी को EIF स्टाफ की तरफ से परमीशन मिली थी कि वो EIF की तरफ से मल्टाई मिलियन डालर सप्लाई कांट्रैक्ट को साइन कर सके।

“ये सब बाते ये दर्शाती है कि PMC & EIF के बीच कोई फर्क नही था। और वो सब, ज्यादा बिलिंग करके इंडिया से फ्राड तरीके विदेश पैसे भेजने के बडे प्रक्रिया का हिस्सा बनकर, एक साझा हित के लिये कार्य कर रही थी।

 

 

जांच अधिकारियो ने निष्कर्ष दिया.

DRI & ED दोनो से इस पर टिप्पणी के लिये सम्पर्क किया गया। EIF से भी सम्पर्क का प्रयास किया गया पर कम्पनी ने किसी भी फोन काल या ईमेल का जबाब नही दिया।

हुंडई हैवी इंडस्ट्री ने भी इस पर टिप्पणी के अनुरोध का जबाब नही दिया।

ये भी स्पष्ट नही है कि इस invoice inflation पर आरोपो का फैसला दिल्ली मे कब होगा। सिर्फ अदानी प्रवक्ता की टिप्पणी कि “निकट भविष्य मे” फैसले की उन्हे उम्मीद है के बाद लगा दी गयी है। उधर क्वींस्लैंड मे इस वर्ष के अंत तक अदानी को करीब 1 अरब डालर के लोन पर NAIF के निर्णय की उम्मीद है।

 

(टीम-मध्यमार्ग)

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