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लोकतान्त्रिक मूल्यों को बचाने के लिए एक छोटा मगर महत्वपूर्ण प्रयास

भोपाल, मध्यप्रदेश से 2019 लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से आतंकवाद की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाये जाने के विरोध में एक ऑनलाइन याचिका दी गयी है। जिसे अभी तक लगभग 2000 लोगों ने साइन किया है और यह संख्या बढ़ती जा रही है।

Fingertip feminism फेसबुक पर स्त्री समस्याओं को लगातार उठाने वाला एक पेज है जिसने इस मुहीम की शुरुआत की। वहां उन्होंने कहा कि “हम FF (FingertipFeminism) पर ऐसा मानते हैं कि लैंगिक न्याय किसी सार्थक प्रतिनिधित्व के बिना संभव नहीं है। इसके साथ ही, नारीवादियों के रूप में हम मानते हैं कि किसी भी उदार धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक समाज में सामाजिक न्याय की लड़ाई प्रतिनिधित्व की राजनीति में उत्पीड़ित पहचान की महिलाओं और गैर-पुरुषों के सामान प्रतिनिधित्व के बिना अधूरी है।”

आगे कहा गया है कि “हम प्रज्ञा ठाकुर के नामांकन को बगैर शर्त खारिज करते हैं. कानून की भावना और भारत के संविधान में निहित मूल्यों के इस तरह खुलेआम उल्लंघन को किसी भी तरह से देश की चुनावी राजनीति में लैंगिक असमानता को कम करने के प्रयास के रूप में नहीं माना जा सकता है.

लोगों से इस याचिका पर हस्ताक्षर करने की अपील करते हुए कहा गया है,”हम नारीवादियों और अन्य सभी संबंधित जनता से अनुरोध करते हैं कि वे इस तरह के संगीन बयानों को खारिज करें और प्रज्ञा ठाकुर के नामांकन को वापस लेने की मांग करें।
कृपया अपनी सहमति के लिए इस याचिका पर हस्ताक्षर करें”

FF APPEALS TO FEMINISTS TO REJECT TERROR ACCUSED SADHVI PRAGYA SINGH THAKUR AS OUR REPRESENTATIVEWe at FF think that…

Fingertip Feminism ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಸೋಮವಾರ, ಏಪ್ರಿಲ್ 22, 2019

सोशल मीडिया पर प्रज्ञा ठाकुर के नामांकन को लेकर कई लोगों ने विरोध जताया और FingertipFeminism ने इसे एक मुहीम बना दिया। यह एक छोटा प्रयास ज़रूर है लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास है। और किसी भी तरह का विरोध चाहे वो किसी भी प्लेटफॉर्म से किया जाए, सत्ता पर दबाव ज़रूर बनाता है। जैसा कि इस पेज को चलाने वाली और इस मुहीम की अहम् सदस्य सबीना कहती हैं –

“भारत के लोगों को ऐसे चुनाव का विरोध करना चाहिए जिसमे आतंकवाद के आरोपियों को उम्मीदवार बनाया जा रहा है। भोपाल में भाजपा को दूसरा उम्मीदवार खड़ा करना चाहिए।
यदि उनके पास योग्य उम्मीदवारों की इतनी कमी हो गयी है कि उन्हें चुनाव लड़ने और प्रचार करने के लिए सभी प्रकार के आतंकी दोषियों / अभियुक्तों को जमानत पर बाहर निकालना पड़ रहा है, तो वे चुनाव लड़ ही क्यों रहे हैं? “

वे आगे कहती हैं -“इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हम इसे क्यों सहन कर रहे हैं? क्या हमने सामूहिक रूप से अपने दिमागों पर ताले जड़ दिए हैं ? या हमने मान लिया है कि टीवी पर बोलना, सोशल मीडिया पर लिख देनाऔर सार्वजनिक बैठकें कर लेना अपने आप में पर्याप्त है ? मैं यह मानने से इंकार करती हूं कि हमारे देश में (और यह जितना बड़ा देश है) नागरिक समाज इतना बौद्धिक रूप से भ्रष्ट और नैतिक रूप से दिवालिया और आत्मतुष्ट है कि वह इस तरह के घृणित राजनीतिक कृत्यों को रोकने का कोई रास्ता नहीं खोज सकता है। ऐसे राजनीतिक कृत्य जो ऐसे तथाकथित हिंदुओं को अल्पसंख्यकों के सामने आये दिन अपनी दबंगई दिखाने के लिए प्रेरित करते हैं “

याचिका निम्न को सम्बोधित है :


राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई
सुनील अरोरा
राहुल गाँधी
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग
मुख्तार अब्बास नक़वी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

याचिका में कहा गया है –

भाजपा ने 17-04-2019 को साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल से लोकसभा के लिए नामांकित किया , जो 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में मुख्य आरोपी हैं. यह पहली बार है जब भारत में एक प्रमुख राजनीतिक दल आतंकवाद के आरोपी किसी व्यक्ति को टिकट दे रहा है.

ठाकुर मुंबई की एक अदालत में द अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) के मुकदमे की कड़ी धाराओं के तहत है, और ‘स्वास्थ्य आधार’ का हवाला देते हुए जमानत पर बाहर है। अप्रैल 2017 में, उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी जहाँ उन्होंने दावा किया था कि वह स्तन कैंसर के कारण दुर्बल हो गई हैं और उन्हें पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा है। जबकि 2019 में वह न केवल सार्वजनिक जीवन को फिर से शुरू करने, बल्कि चुनाव लड़ने तक के लिए पर्याप्त स्वस्थ हैं।

हम भारत के नागरिकों और संबंधित कानून के अनुसार, मुसलमानों के खिलाफ आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड आरोपी भाजपा के एक व्यक्ति के नामांकन को अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ अपने युद्ध में नवीनतम लड़ाई मानते हैं। यह हिंदुत्व कट्टरपंथियों के समर्थकों तक यह मैसेज पहुँचाने का तरीका है कि हम आपके साथ हैं और और हिंदू ध्रुवीकरण को आगे बढ़ाने में उन्हें मदद करने के लिए तैयार हैं.