ख़बरें व्यंग

शिवराज सिंह ने फेंकने में नरेंद्र मोदी को भी पीछे छोड़ दिया, ट्विटर पर खूब उड़ा मज़ाक

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अमेरिका की सड़कों की तुलना में मध्य प्रदेश में सड़कें बेहतर हैं। वाशिंगटन डीसी में अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी के दौरान मुख्यमंत्री ने यह कहा। आगे उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने वास्तव में गावों को शहरों से जोड़ने के लिए 1.75 लाख किलोमीटर सड़कें […]

व्यंग

दो दुना चार होता है लेकिन आप कह रहे हैं छह होता है तो छह ही होगा

दो दुना छह होता है । क्यों ? क्योंकि मैं कह रहा हूं । जी सर , सही कहा आपने । दो दुना चार होता है लेकिन आप कह रहे हैं छह होता है तो छह ही होगा । देखो तुम अभी भी गलत कह रहे हो । चार का बिल्कुल भी उल्लेख नहीं करना […]

मुद्दे व्यंग

काल चक्र, समय का पहिया और स्वयं को दोहराता इतिहास

सनातन संस्कृति और जड़ों से जुड़े लोग अच्छी तरह जानते ही हैं की सृष्टि में सभी कुछ चक्र में चलता है । ब्रह्माण्ड बिग बैंग के चलते फैलता सिकुड़ता है । सत, त्रेता, द्वापर, कल युगों का पहिया घूमता है । सूरज अपनी जगह, सभी ग्रह अपने ध्रुवों पे घूमते हैं, आत्मा तीनों लोकों में, […]

मुद्दे व्यंग

सरकार, राजनीति और ब्यूरोक्रेसी पर कुछ तीखे मनोरंजक व्यंग

एक सरकार जो इतनी शक्तिशाली हो कि आपको सब कुछ दे सके जो आप चाहते हैं, वो इतनी शक्तिशाली भी होती है कि आपका वो सब कुछ भी छीन ले जो अभी आपके पास है – थामस जेफरसन   अपने जीवन के इन तमाम वर्षों में मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि एक बेकार […]

मुद्दे व्यंग

विकास पागल हो गया है

केंद्र सरकार का 3 साल तो लफ्फाजी में गया गोद लिए गाँव मर गए। गंगा बेचारी अधमरी है। जनधन खाते में पैसे नहीं हैं और उसको मेंटेन करने की वसूली उनसे हो रही है जिनके खाते में 5000 रुपये से कम हैं । स्मार्ट सिटी बजबजा रहे हैं। सरदार पटेल की मूर्ती के लिए बटोरा […]

व्यंग

बुलेट ट्रेन : एक प्रेम कथा

आज से ठीक ३ साल पहले भारत में बुलक कार्ट की जगह बुलेट ट्रेन लाने की हवा उड़ाई गई थी। मुंबई से अहमदाबाद। अब उसका शिलान्यास का टेम आ गया है। इसके समर्थन में कई मूर्ख अर्थशास्त्री रोज अखबार काले कर रहे हैं सम्पादकीय के। रोज नए-नए आंकड़े किसी गुप्त विश्लेष्ण से ला रहे हैं। सफर […]

मुद्दे व्यंग सोशल

जब विश्‍वगुरू को अंग्रेज़ों ने सिखाया, विज्ञान और समाजिकता

कल क्रिस्टोफर हिचन्स की विदाई तिथि गुजरी है। रेशनल और वैज्ञानिक सोच का झंडा बुलंद करने के लिए उनका संघर्ष यादगार रहा है। दुर्भाग्य से भारतीय समाज में ऐसे लोग बहुत कम हुए हैं और हुए भी हैं तो उनका आम जन से रिश्ता ही नहीं बनने दिया गया है। भारतीय समाज इतना अंधविश्वासी, कुपढ़ […]

मुद्दे व्यंग सोशल

रोह‍ित वेेमुला दलि‍त नहीं थे, गोरखपुुुर में बच्चे बीमारी से मरे और पृथ्वी शेषनाग के फन पर टि‍की है

तो हुकुम… आपकी तो सचमुच जश्न-ए-आजादी हो गई..! आप नाच रहे हैं न…!! झूम रहे हैं न…!! झूमना ही चाहिए आपको… नाचना ही चाहिए… कि आपकी तो सचमुच जश्न-ए-आजादी हो गई..! आपने अपने अपनों को बचाने के लिए जिन्हें तैनात किया था, उन्होंने आपके नमक की लाज रख ली…! रोहित दलित नहीं थे… उन्होंने निहायत […]

बिना श्रेणी व्यंग

हम आज़ाद कहां ?

हम आज़ाद कहां? देश आज़ाद है पर मैं आज़ाद कहां हूं। मुझे भी मुक्त कर करा दो हुक्मरानो।। क्यों दे रहे हैं डेल्टा रोहित तुम्हारे राज में जान। क्यों है दलित का हाल बेहाल ये बता दो।। हो रही मुझपे राजनीति, पर मैं आज़ाद कहां। होता आज़ाद तो जीता जी भर के सुकून से।। हाँ, […]

मुद्दे व्यंग

दलाली , बेशर्मी , कुछ भी पहली बार नहीं हुआ है

साल 2017 चल रहा है। अगस्त का महीना है। इसका मतलब है कि 2017 अगस्त जा चुके है उससे पहले का हिसाब गोल कर भी दिया जाए  तो भी। साल महीनें ज़िन्दगी की फिलॉसफी यही है कि नया कुछ नही होता वही चीजें रिपीट होती रहती है। 2017 साल हो गए आदमी का नेचर वही […]