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विपश्यना : एक अनूठा संस्मरण – 10 (प्रकृति के नियम और धर्म)

इगतपुरी का विपश्यना केंद्र प्राकृतिक रूप से बहुत मनोरम स्थल पर बना हुआ है। पहाड़ी के नीचे बने हुए कमरे। कहीं कोई आवाज नहीं। रात को कभी-कभी ट्रेन की सीटी सुनाई देती। उसके अलावा चिड़ियों की चहचहाहट। खामोशी ऐसी कि वहां रहने वाला कोई कभी कुछ नहीं बोलता था। पूर्णतया शांति का वातावरण। शांति के […]

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विपश्यना : एक अनूठा संस्मरण भाग – 9 (मुक्ति का मार्ग)

बुद्ध का धम्म मौजूदा धर्म से अलग रहा है। कम से कम मोटी बात समझ में आई। बुद्ध के मुताबिक धर्म वह है जो मानव के बीच भेद न करे। चाहे जाति, क्षेत्र, सम्प्रदाय, मान्यताएं कोई भी, कुछ भी हों।   बुद्ध के अनुसार धर्म बुद्ध के मुताबिक अपने तर्कों व अनुभूतियों से खुद को जानना और प्रकृति के […]

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रेल मंत्री रेल में घूम-घूमकर पूछ रहे हैं कि बताइए, आपको कोई कष्ट तो नहीं है

रेल मंत्री पीयूष गोयल की यह पहल अच्छी है। पीयूष गोयल खानदानी नेता हैं। उनके पिता भी भाजपा के बड़े नेता और मंत्री भी रहे हैं। स्वाभाविक है कि उन्होंने कभी ट्रेन में यात्रा नहीं की होगी और अगर की होगी तो एसी फर्स्ट क्लास से नीचे न उतरे होंगे। ऐसे में अगर वह सचमुच यात्रियों […]