मुद्दे सोशल

भारत में “फेमिनिज़्म” की परिपूर्णता एक मिथक है

नारीवाद की अवधारणा भारत में केवल सवर्ण महिलाओं का फैशन है क्योंकि यहाँ फेमिनिज़्म पितृसत्ता का बुलेटप्रूफ़ जैकेट और ब्राह्मणवाद का हथियार है। दरअसल स्त्री अधिकारों और समानता की मुनादी करने वाले सवर्ण नारीवादी लोग ब्राह्मणवादी सिस्टम की कठपुतलियाँ हैं, जिन्हें जातीय प्रिविलेज की रक्षा करने के लिए नारीवाद के नाम का झुनझुना पकड़वाया गया […]

मुद्दे सोशल

भारत में क्‍या है अछूत लड़की होने के मायने?

जब तक होश नहीं संभाला था, पता ही नहीं था कि मैं एक अछूत परिवार में जन्मी हूँ। औऱ भारतीय समाज में अछूत लड़की होने के क्या मायने हैं। पहली बार जातिभेद तब झेला जब मैं मात्र 3-4 साल की थी एक ग़रीब परिवार की बच्ची के लिए खीर-पूड़ी बहुत बड़ी बात थी। खीर-पूड़ी खाने […]

मुद्दे

गिरती GDP, जड़ होती अर्थव्यवस्था और आर्थिक मंदी की आहट

भारतीय अर्थव्यवस्था पर मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का प्रभाव आर्थिक मंदी के रूप में दिखाई दे रहा है| नोटबंदी और जीएसटी की जुगलबंदी ने देश को ऐसे गर्त में धकेल दिया है जिसकी भरपाई दीर्घकाल में भी संभव नहीं है| आर्थिक मंदी के चलते पिछली तिमाहियों में ही सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि […]

मुद्दे सोशल

‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और सरकार का वास्तविक एजेंडा

मोदी सरकार ने दो साल पहले बड़ी जोर-शोर से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना शुरू की थी। इस योजना के प्रचार-प्रसार में ही अब तक 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं। यह सरकार की फ्लेगशिप प्लानिंग में से एक है। हर साल भारी-भरकम बजट आवंटन के द्वारा सरकार बेटियों को बचाकर, उन्हें पढ़ाकर लिंगानुपात […]

मुद्दे सोशल स्त्री-विमर्श

अछूत लड़कियों को काली-कलूटी ‘चमरिया’ बोलना मध्यप्रदेश में बहुत सामान्य है

भारत में सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई, कचरा इक्कट्ठा करने से लेकर टॉयलेट्स साफ करने का काम पीढ़ियों से दलित समुदाय के लोग ही करते आएँ हैं। ऐसे नहीं है कि कोई शौक से इस काम को करना चाहता है, बल्कि अधिकांशतः इन पर ये काम अपनी जाति के कारण थोपा जाता है। दरसअल जाति आधारित […]

मुद्दे स्त्री-विमर्श

भार‍तीय नारियों की आधुनिकता और करवाचौथ का पूरा चांद

सुपुण्ये भारते वर्षे पतिसेवां-पूजनं करोति या। वैकुण्ठे स्वामिना साध्दर्मं सा याति ब्रह्मणं पदम्।। (ब्रह्मवैवर्त. प्रकृति.४६। ३७) अर्थात ‘जो स्त्री इस पुण्यभूमि भारतवर्ष में पति सेवा और पूजन करती है, वह अपने पतिसहित परब्रह्म परमात्मा के स्थान वैकुण्ठ को प्राप्त होती है।’ इस श्लोक को पढ़कर समझना मुश्किल नहीं है कि करवाचौथ जैसे शोषक प्रपंच वाले […]

मुद्दे सोशल

सिंर्फ धांधलेबाजी नहीं, अघोषित जा‍तीय आरक्षण है म0प्र0 लोक सेवा आयोग घोटाला

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में मुख्य परीक्षा में सामने आया बड़ा घोटाला सिर्फ जैन समुदाय तक सीमित नहीं है। दरसअल यह सवर्णों का, सवर्णों द्वारा, सवर्णों के लिए रचा और तचा गया मैकेनिज़्म है, जो बहुत लंबे समय से सक्रिय है। इस पूरे मैकेनिज़्म का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है जाति। जातिगत आधार पर लम्बे समय […]

मुद्दे सोशल

सब काला बुरा होता है ना?

काले रंग को लेकर कितने सिलेक्टिव हैं ना आप। हाँ-हाँ, आप ही को कह रही हूँ। काले रंग के बाल चाहिए, आँखें चाहिए……..पर काला इंसान नहीं। काला तन तो किसी तरह तब भी चला लिया जाएगा पर काला मन? काला मन कैसे चल सकता है क्योंकि वो तो बुरा होता है ना? कोई दिन बुरा […]

सोशल

पहाड़ सबके लिए खूबसूरत नहीं हैं, अछूतों की चीखें उनमें दफ़्न होती हैं

ज़िंदगी को देखने-समझने के नज़रिये और अपने अनुभव से गुने मायने ना चाहते हुए भी आपके व्यवहार को प्रभावित करतें ही हैं। शायद मैं अब तक भी इतनी परिपक्व नहीं हो पाई कि उन अनुभवों को किनारे रख निष्पक्ष भाव से व्यवहार कर पाऊँ। यदि जीवन उन अनुभवों के साथ जी रहें हैं तो हिम्मत […]

मुद्दे स्त्री-विमर्श

इस दुनिया का सबसे वर्स्ट कॉम्बिनेशन है काली अछूत लड़की होना

वैसे तो लड़कियों के इनबॉक्स में रोज़ तमाम तरह के मैसेज आतें हैं, पर बीते दिनों कुछ लड़कियों के जो मैसेज आए उसने मुझे लिखने पर मजबूर कर दिया। पहाड़ों पर घुमक्कड़ी की कई फ़ोटोज के अपलोड के दौरान बहुत से कॉमेंट और मैसेज मिले, लेकिन मेरी लड़की दोस्तों ने जो लिखा वो लगभग कई […]